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فتاویٰ > शिष्टाचार > रिश्तेदारों के अधिकार

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f:1343 -    क़ुरान करीम में सूक्ष्मता से व्यवहार का आदेश
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Question:     मुफती साहब रिश्तेदारों के साथ संबंध के महत्व पर क़ुरान शरीफ में क्या मार्गदर्शन मिलती हैं, वर्णन करें।
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Answer:     क़ुरान शरीफ की विवध आयतों में कुशल व सूक्ष्मता से व्यवहार करने का आदेश है और नातेदारी व रिश्तेदारी समाप्त करने वालों को धरती में फसाद व भ्रष्टाचार करने वाले घोषित दिया गया और क़यामत के दिन नुक़सान उठाने वाले कहा गया।  अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- (ये अवज्ञाकारी वह लोग हैं) जो अल्लाह की प्रतिज्ञा को उस सुदृढ़ करने के पश्चात भंग कर देते हैं (उस संबंध को कांटते हैं), और जिसे अल्लाह तआ़ला ने जोड़ने का आदेश दिया है उसे डालते हैं, और धरती में बिगाड़ पैद करते हैं, वही हैं जो घाटे में है।  

(सुरह अल बक़रहः 02:27)  

और माता-पिता व नातेदारों से शिष्टाचार का निर्देश फरमाया, इरशाद हैः-

भाषांतरः- और (याद करो) हम ने यअ़खूब से सुदृढ़ वचन लिया के अल्लाह तआ़ला के अतिरिक्त (किसी और की) इ़बादत ना करना और माता-पिता के साथ कुशल व्यवहार करना और नातेदारों के साथ और अनाथों और मुहताजों के साथ अच्छा व्यवहार करना और साधारण लोगों से (भी नरमी और खुशी के साथ) नेकी की बात कहना और नमाज़ क़ायम रखना और ज़कात देते रहना, फिर तुम में से कुछ लोगों के सिवा सारे (इस वचन से) फिर गए और तुम (सत्य से) उपेक्षा की नीति ही अपनाए हो।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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