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فتاویٰ > शिष्टाचार > रिश्तेदारों के अधिकार

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f:1342 -    रिश्तेदारों के साथ कुशल व्यवहार करने का आदेश
Country : हैद्राबाद, भारत,
Name : फहीम
Question:     यदि कोई रिश्तेदार व नातेदार हमारे माता-पिता को तकलीफ दे और हम इस बात करना नहीं चाहते तो ये कहाँ तक श्रेष्ठ है?
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Answer:     रिश्तेदार व नातेदार का आप के माता-पिता को तकलीफ देना श्रेष्ठ नहीं।  तथा यदि आप उन से बात ना करें तो ये भी श्रेष्ठ ना होगा, आप अपने रिश्तेदार को समझानेकी कोशिश करें, उन से संबंध निर्वाह व कायम रखें एवं अच्छा व्यवहार करें।  कुशल व्यवहार से संबंध जामेअ़ तिरमिज़ी में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबदुल्लाह बिन उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से वर्णित करते हैं, आप सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः कुशल व्यवहार करने वाला वह नहीं जो बराबरी व तुलना करें परन्तु कुशल व्यवहार करने वाला वह व्यक्ति है के जब रिश्तेदारी टूट हो जाए तो वह उस को मिलाए।  

(जामेअ़ तिरमिज़ी, जिल्द 2, हदीस संख्याः 1831)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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