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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1314 -    क़ुरान करीम को चूमना
Country : हैद्राबाद,
Name : बसीर
Question:     अधिकतर लोग क़ुरान मजीद की तिलावत के बाद इस को चूमते हैं क़ुरान करीम को चूमना एवं बोसा लेना कहाँ तक श्रेष्ठ है?
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Answer:     क़ुरान करीम अल्लाह तआ़ला का आदरणीय व सम्मानित कलाम है जिस का आदरम, सम्मान व गौरव प्रत्येक मुसलमान के दिल में होती है।  अर्थात इस विशाल व महान पुस्तक को चूमना इस के सम्मान व आदर के बाब से है सहाबा के रिवाज का सबूत मिलता है।  

दुर्रे मुहतार में व्याख्या है, हज़रत फारूख आज़म उ़मर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु हर सवेरे मुसहफ मुबारक लेते इस को चूमते और फरमाते “ये मेरे पालनहार का फरमान और मेरे रब का मन्शूर है” और इसी प्रकार हज़रत उसमान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु क़ुरान का बोसा लेते और इस को अपने चहरे पर रख रक बरकत प्राप्त करते।  दुर्रे मुक़तार जिल्द 5, पः 272 में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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