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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1312 -    लैलतु मुबारका का एक विस्तार तात्पर्य
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Question:     प्रश्न ये है के क़ुरान के सुरह दुखान में जो आयत इन्ना अंज़लनाह फी लैलता मुबारका वर्णन की गई है इस से बरात की रात मुराद है या क़द्र की रात?  अवश्य उत्तर दीजिए।
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Answer:     लैलता मुबारकता (बरकत वाली रात) का तात्पर्य व अर्थ कया है?  इस सिलसिले में मुफस्सिरीन ने दो प्रकार के लोकोक्ति वर्णन किए हैं।  कुछ ने फरमायाः इस से बरात की रात मुराद है और कुछ ने फरमाया क़द्र की रात।  इन दो लोकोक्ति की ततबीख व जमा में ये कहा गया के लैलता मुबारका के बारे में आया हैः-

भाषांतरः- इस में हर हिकमत वाले कार्य का निर्णय (फैसला) किया जाता है।  

(सुरह अद द़ुखानः 44:04)  

इस से मालूम हुआ के इस धन्य रात में निर्णय होते हैं।  एवं हदीस में है के निर्णय शअ़बान की पंद्रहवीं रात में होते हैं एवं लैलता मुबारका में संबंधित फरिश्तों के हवाले किए जाते हैं।  

पस लैलता मुबारका की तफसीर लैलतुल क़द्र की जाए तो निर्णय नामा जात जिम्मेदारों के हवाले करने की रात होगी और बरात की रात से विस्तार की जाए तो निर्णय करने की रात मुराद होगी।  

भाषांतरः- हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है निश्चय अल्लाह तआ़ला बरात की रात में निर्णय फरमाते हैं एवं क़द्र की रात जिम्मेदारों के हवाले फरमाते हैं।  

(हाशियह अल जमल अ़ला अल जलालैन, जिल्द 4, पः 100)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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