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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1311 -    महिलाओं से क़ुरान सुन्ने का प्रबन्ध
Country : परभनी,
Name : बशीर उद्दीन
Question:     रमज़ान के धन्य महीने में अन्य स्थान पर क़ुरान के सुन्ने का प्रबन्ध किया जाता है कुछ स्थान पर क़ुरान के हाफिज़ की तिलावत करते हैं और कुछ घरों में क़ुरान की हाफिज़ा महिलाएं तिलावत करती हैं और माइक का भी प्रबन्ध किया जाता है क्या तिलावत के समय पुरुष लोक के लिए इन हाफिज़ा महिलाओं की आवाज़ सुन्ना जाइज़ है?
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Answer:     निश्चय रमज़ान को अल्लाह तआ़ला ने क़ुरान प्रकट करने के लिए चुनाव कियाः

भाषांतरः- रमज़ान वह महीना है जिस में क़ुरान प्रकट किया गया।  

(सुरह अल बक़रहः 02:185)  

रमज़ान को क़ुरान से एक विशेष नाता प्राप्त है और इस में क़ुरान पढ़ने और सुन्ने का प्रबन्ध करना सवाब व पुण्य में अधिकता का कारण है।  

महिलाओं का महिलाओं से क़ुरान सुन्ने में कोई समस्या नहीं परन्तु पुरुष लोग के लिए महिलाओं से क़ुरान सुन्ना श्रेष्ठ नहीं इसी प्रकार महिलाओं का बुलंद आवाज़ या माइक के द्वारा तिलावत करना जिस से पुरुषों तक आवाज़ पहुंचे उचित नहीं क्यों के महिलाओं की आवाज़ भी महिला (स्त्री) है जिस को प्रकट करने की आज्ञा नहीं हैं।  दर्रुल मुहतार, जिल्द 5, पः 261 में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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