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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1310 -    सुरह अल हज्ज के दूसरे सजदे का आदेश
Country : हैद्राबाद,
Name : रहीम
Question:     क्या हम क़ुरान करीम के सत्रहवें पारे का सजदा कर सकते हैं?  मैं ने सत्रवहें पारे की तिलावत की मेरे साथ मेरे एक खलेरे भाई थे मैं ने इन से वार्तालाप किया के इस पारे में दो सजदे हैं, इन्हों ने कहा किन्तु 1 ही सजदा करना चाहिए दुसरा नहीं।  इस लिए मैं आप से ये प्रश्न कर रहा हुँ कृपया विस्तार से उत्तर दें।
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Answer:     क़ुरान करीम में 14 स्थान पर सजदे तिलवात अनिवार्य व वाजिब है।  इमाम शाफई़ रहमतुल्लाहि अलैह के धर्म के अनुसार सुरह अल हज्ज में 2 सजदे तिलावत हैं।  हनफी फिक़्ह के पास सुरह अल हज्ज का दुसरा सजदा, सजदे तिलावत नहीं है।  

जैसा के शरह मअ़ना आसार, जिल्द 1, किताबुस सलाह, पः 248/249 में हैः-  

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबदुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है इन्हों ने फरमायाः सुरह अल हज्ज में पहले सजदा, अज़ीमत है और दूसरा सजदा शिक्षा के रूप में है।  

सुरह अल हज्ज के दूसरे सजदे की आयत में सजदे का वर्णन रुकु के साथ आया है।  क़ुरान करीम की जिस आयत में रुकु के साथ सजदा वर्णन किया जाता है इस से नमाज़ का वर्णन उद्देश्य होता है।  सजदे से तात्पर्य नमाज़ का सजदा होता है तिलावत का नहीं।  जैसा के सुरह आले इमरान में हैः-

भाषांतरः- और सजदा करो और रुकु करो।  

(सुरह आल इमरानः 03:43)  

और सुरह आल इमरान की इस आयत पर सजदे तिलावत नहीं किया जाता।  

जैसा के बिदाअ़ अस सनाअ़ जिल्द 1, किताबुस सलाह, पः 451/452 में है।  

अर्थात हनफी सुरह अल हज्ज का दूसरा सजदा ना करें किन्तु यदि कोई साहब, शाफई़ धर्म के इमाम की इखतेदा में नमाज़ संपादन कर रहे हों तो इमाम के पालन में इस समय सजदे तिलावत कर लें।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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