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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1308 -    3 पावन रातें क़ुरान करीम के आधार पर
Country : खिलअ़ गोलकुंडा,
Name : कलीम असलम
Question:     रज्जब शअ़बान और रमज़ान में जागने की रातें आती हैं।  इन रातों में हम जाग कर अल्लाह तआ़ला की इ़बादत करते हैं।  इस बारे में मेरा प्रश्न ये है के हम इन रातों में विशेष रू से क्यों जागते हैं?  क्या इन रातों के बारे में क़ुरान में कुछ वर्णन आया है?
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Answer:     वर्ष में चंद ऐसी पावन रातें आती हैं जो अपनी प्रतिष्ठा व उत्तमता, बरकतों व रहमतों में गौरव शान रखती हैं एवं प्रत्येक रात की अलग विशिष्टता है और क़ुरान में विशेष रूप से 3 रातों का वर्णन आया है।  

(1)- रज्जब के महीन में मेअ़राज की रातः जिस में बन्दा और रब, मुहिब व महबूब की मुलाकात हुई सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने अल्लाह तआ़ला का शर्फ प्राप्त किया और मुहिब व महबूब के बीच अच्चारण व प्रकाशन की बातें हुईं।  सुरह बनी इसराई़ल की प्रथम आयत में- लैलन में लैला से निश्चिंत रूप से मेअ़राज की रात है।  

(2)- रमज़ान के महीने में शबे-खद्रः जो क़ुरान के प्रकट होने की पावन रब है जिस में फरिश्तों का विर्द होता है और इस रात में अल्लाह के बन्दों को 1000 महीनों की इबादत से बढ़ कर पुण्य व सवाब प्रदान होता है।  अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- वह रात पूर्णतः शांति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक।  

(सुरह अल क़द्रः 97:05)  

इस आयत में क़द्र की रात का वर्णन है।  

(3)- शअ़बान के महीने में बरात की रातः ये बरकतों वाली रात है जिस में अल्लाह के बन्दों को बख्शिश का सारांश मिलता है।  इस रात का वर्णन सुरह दुख्खान की प्रारंभ 4 आयतें में है।  मुफस्सिरीन की एक जमात के पास लैलतुल बकरह से तात्पर्य शअ़बान की पंद्रहवीं रात है जीसे लैलतुल बराह (शबे बरात) कहा जाता है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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