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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1307 -    बच्चों को अनुक्रम व तरतीब के विरुद्ध क़ुरान की शिक्षा देना
Country : भारत,
Name : तैयिब खान
Question:     बच्चों को सामान्य रूप से 30 पारे के अंत से सुरे याद दिलाए जाते हैं जबके ये तरतीब व अनुक्रम क़ुरान की शिक्षा के पूर्णतया रूप से विरुद्ध है।  क्या इस प्रकार सूरतों के विरुद्ध शिक्षा देना श्रेष्ठ है?
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Answer:     क़ुरान करीम के सूरतों की जो तरतीब व अनुक्रम हैं इसी तरतीब से तिलावत व शिक्षा का प्रबन्ध करना चाहिए।  तरतीब के विरुद्ध तिलावत करना मकरुह है।  जहाँ तक न्यून बच्चों के लिए हिफ्ज़ व शिक्षा में सुविधा पैदा करने और सरलता व आसानी होने के उद्देश्य से इस को बिना कराहत व समस्या जाइज़ कहा है।  

इस लिए के पारे अ़म्मा के अंत की सूरतें प्रारंभ की सूरतों के समानता सीमित व छोटी हैं।  बच्चों को आसानी से याद हो जाती हैं और नमाज़ में तिलावत के लिए सुविधा हो जाती है किन्तु नमाज़ की स्थिति में सूरतों को तरतीब के विरुद्ध पढ़ना मकरुह है।  जैसा के रद्दुल मुहतार, जिल्द 1, किताबुल सलाह, पः 404 में है।  

भाषांतरः- उलटा (तरतीब के विरुद्ध) इस प्रकार तिलावत करना मकरुह है के प्रथम रकात में जो सुरह तिलावत करें दूसरी रकात में इसके ऊपर का सुरह पढे इस लिए के तिलावत में सूरतों की तरतीब, तिलावत की अवश्यकता में प्रवेश है।  किन्तु इस को शिक्षा की अवश्यकता के लिए बच्चों की सरलता व आसानी के लिए तरतीब के विरुद्ध करना जाइज़ रखा गया।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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