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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1306 -    अलम यजिदका यतीमन फआवा की अनोखी तफसीर
Country : कमलापूर कालोनी, भारत,
Name : मुहम्मद हबीब अबदुल खादर
Question:     एक अनिवार्य प्रश्न से संबंधित विस्तार उत्तर प्रदान करें।  स्वतः बंजारा हिल्ज़ की एक मसजिद में खिताब (भाषण) के दौरान एक मौलाना साहब से सुरह अल ज़ुहा की आयत अलम यजिदका यतीमन फआवा का विस्तार में ये सुनाः क्या अल्लाह ने आप को एकता व बेमिसाल नहीं पाया तो अपने आग़ोश करम में रखा।  मुजे इस पर विरोध करना उद्देश्य नहीं है परन्तु सामान्य रूप से यतीम का जो अर्थ वर्णन किया जाता है ये इस के अतिरिक्त है।  इस लिए कृपया कु़रान व हदीस के आधार पर दलील से उचित अर्थ बतलाएं।
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Answer:     क़ुरान करीम अल्लाह तआ़ला का पावन कलाम है जो विशिष्ट शान व वैभव रखता है।  बलाग़त व विस्तार व फसाहत के प्रति कमाल पर है।  जिस आयत कलीमात में से प्रत्येक में ज्ञान व विद्या व प्रज्ञानता, सत्यता के उपस्थित है।  

शब्द यतीम की तफसीर के प्रति में जो नामवर अर्थ वर्णन किया जाता है वह अपने स्थान श्रेष्ठ है।  परन्तु ये शब्द वही एक अर्थ में सीमित नहीं है बल्कि मुफस्सिरीन ने इस के अन्य अर्थ भी वर्णन किए हैं।  

इमाम मुजाहिद बिन जबर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु जिन्हों ने हज़रत सैयदना अबदुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु व अन्य सहाबा किराम के वास्ते से सरकार दो आ़लम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से ज्ञान व विद्या व प्रज्ञानता का विशेष फैज़ व आशीर्वाद पाया है।  माननीय ताबई़न, क़ुरान के ज्ञान के विद्वान मुहद्दिस व इमान हैं वे फरमाते हैः-

(तफसीर खुरतुबी जिल्द 20, पः 92 तफसीर सअ़लबी सुरह अज़ ज़ुहा)  

शब्द यतीम अरब के मुहावरे दुर्रह यतीमा से प्रकार हैं।  जिस के अर्थ हैं- वह नायाब मोती जो मूल्य व सम्मान में बेमिसाल हो।  पेश आयत के अर्थ व तात्पर्य ये होंगे के अए हबीब क्या इस ने आप को प्रतिष्ठा व आभूषण में एकता व बेमिसाल नहीं पाया के आप जैसी प्रतिभा व शान वाला कोई नहीं।  
तो अल्लाह तआ़ला ने आप को अपने आग़ोश करम में रखा।  

अल्लामा सैय्यद महमूद आलूसी बग़दादी ने तफसीर रूहुल मअ़नी जिल्द 16, पः 290 में इस अर्थ को वर्णन कर के इसी को उच्च व प्रथम घोषित किया।  जैसा के आप फरमाते हैं

भाषांतरः- श्रेष्ठतर व उच्च ये है के इस को युं तफसीर की जाए क्या उस ने आप को सम्पूर्ण कायनात में एकता व बेमिसाल नहीं पाया के कायनात के सदफ ने आप जैसी शान वाला वास्तव में देखा ही नहीं तो इस ने आप को अपने आग़ोश करम में रखा और विशेष नज़दीकी व महबूबियत स्थान के लिए आप को नियुक्त कर लिया।  

अल्लामा इसमाइ़ल हुख्खी ने तफसीर रूहुल बयान जिल्द 10 में कशाफ के हवाले से इस विस्तार को अनोखी व बेमिसाल तफसरी घोषित दी अर्थात आप फरमाते हैं-

अतः उपर्युक्त वर्णन आयत में शब्द यतीम क भाषांतर एकता व बेमिसाल अपने स्थान पर सत्य व श्रेष्ठ भाषांतर है जैसा के तफसीर के इमाम की लिखित में स्पष्ट हो चुका।  

इस की पक्ष हदीस सहीहा से भी होती है।  हज़रत सैयदना अ़ली मुरतज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु सरकार दो आ़लम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के सरापाय मुबारक को वर्णन करने के बाद फरमाते हैं-

भाषांतरः- आप की नअ़त व स्तुति करने वाला अंत में कहता है के मैं ने आप जैसा ना पूर्व कभी देखा ना बाद में।  जैसा के तिरमिज़ी पः 1, मुसनद अहमद बिन इंबल जिल्द 1, पः 187-188, सहीह इब्न हिब्बान जिल्द 6, पः 58 में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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