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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1303 -    क़ुरान की तिलावत का पुण्य
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Question:     अस्सलामु अलैकुम हज़रत मुफती साहब!  हमारे मित्रों में इस मसले पर बात हुई है के क्या प्रमीत व मृतक को क़ुरान मजीद की तिलावत का पुण्य व सवाब इसाल किया जाए तो इन को लाभ पहुंचता है या नहीं?  इस बारे में शरई़ शासन करें तो बहुत बहुत मेहरबानी होगी।
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Answer:     मृतक (मरहुमीन) को सवाब इसाल करने के सिलसिले में प्रमाणित रिवायतें मिलती है।  अर्थात सुनन अबु दाउद में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सअ़द बिन उ़बादह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है इन्हों ने निवेदन कियाः या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम!  सअ़द रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की माता का देहान्त हो चुका है, कौन सा सदखा इन के अधिकार में अधिक उत्तमगुण वाला है?  तो सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः पानी!  तो सअ़द रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने कुआं खुदवाया और कहा ये सअ़द की माँ के लिए है और इस का पुण्य इन के लिए पहुंचता रहे।  

(सुनन अबु दाउद, हदीस संख्याः 1431 / मिशकातुल मसाबीह, पः 196)  

इमाम तबरानी की मुअ़जम औसत में हदीस पाक वर्णन हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबु सई़द खुदरी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है, आप ने फरमाया के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः क़यामत के दिन पहाड़ों के प्रकार पुरुण के साथ नेकियां आएंगी।  तो वह व्यक्ति कहेगा के ये कहाँ से आई हैं?  तो कहा जाएगा तेरे लिए मैं तेरे लड़के की इस्तेग़फार के कारण से।  

(अल मुअ़जम अल औसत लित तबरानी, हदीस संख्याः 1965)  

अबु अल खासिम सअ़द बिन अ़ली ज़ंजानी ने अपनी पुस्तक फवाइद में हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित की है के हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम आदेश फरमाते हैं के जो व्यक्ति कब्रिस्तान में जाए और सुरह फातिहा खुल हुवल्लाह अहद, सुरह अलहाकुमुत तकासुर पढ कर इस का पुण्य व सवाब कब्रिस्तान के मुरदों को पहुंचाए तो ये मुरदे क़यामत में इस पढ़ने वाले के लिए अल्लाह तआ़ला के पास शफाअ़त करेंगे।  

(मिरखातुल मफातीह, जिल्द 2, पः 382)  

खाज़ी अबु बक्र बिन अबदुल बाखी ने अपनी पुस्तक मशीयह में सलमा बिन उ़बैद से वर्णित की है के एक बार रात के समय हम्माद मक्की मक्के के कब्रिस्तान को गए और कब्र पर सररख कर सो गए इन्हों ने सपने में देखा के कब्रिस्तान के मुरदे कई हलखे बना कर बैठे हुए हैं।  मैं ने मुरदों को (ऐसी स्थिति में देख कर) इन से पूछा के क्या क़यामत स्थापित हो गई है?  मुरदे उत्तर दिए के नहीं नहीं!  क़यामत स्थापित नहीं हुई है बल्कि एक व्यक्ति ने सुरह खुल हुवल्लाह अहद पढ कर इस का सवाब व पुण्य इस कब्रिस्तान के मुरदों को बख्शा है और हम सब मरुदे इस का सवाब व पुण्य एक वर्ष से आपस में बंट रहे हैं।  

(मिरखातुल मफातीह, जिल्द 2, पः 382)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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