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فتاویٰ > क़ुरआन करीम

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f:1302 -    कब्रिस्तान में क़ुरान पढ़ना कैसा है?
Country : हैद्राबाद, भारत,
Name : अबरार शरीफ
Question:     मेरे मित्र अहले हदीस हैं वह ये कहते हैं कब्रिस्तान में क़ुरान कि तिलावत करना पाप है क्यों के अल्लाह तआ़ला ने कहा के कब्रिस्तान को इबादतगाह (इबादत का स्थान) नहीं बनाना चाहिए और ये कहता है क़ुरान कि तिलावत सर्वश्रेष्ठ इबादत है।
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Answer:     क़ुरान करीम में कहीं ऐसी कोई निषिद्ध नहीं के कब्रिस्तान में क़ुरान की तिलावत नहीं करना चाहिए।  इस के विरुद्ध हदीसों मं सुरह फातिहा और सुरह बक़रह का वर्णन आया है।  

जैसा के मुअ़जम कबीर तबरानी में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत अयुब बिन नहैक ने फरमायाः मैं ने हज़रत अ़ता बिन उबइ रिबाह से ये फरमाते हुए सुना मैं ने सैयदना अबदुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से सुना, वह फरमाते हैं मैं ने हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम को फरमाते हुए सुना, जब तुम में से कोई देहान्त कर जाए तो तुम उसे रोके मत रखो, और उसे तुरंत इस की कब्र तक पहुंचादो और जब मैयित कब्र में हो तो इस के सरहाने सुरह फातिहा की तिलावत करनी चाहिए और उस के आगे का सुरह बक़रह की अंत आयतों कि तिलावत करनी चाहिए।  

(मुअ़जम अल कबीर लित तबरानी, हदीस संख्याः 13438 / शुअ़बुल इमान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 8986)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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