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فتاویٰ > विश्वास > पैगम्बरों पर विश्वास

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f:1245 -    मीलादुन नबी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की खुशी बनाने की दलील
Country : भारत,
Name : मुहम्मद आ़रिफ
Question:     मैं एक हदीस सुना हुं के अबु लहब को किसी ने सपने में देखा के वह नरक के अज़ाब में है और प्रत्येक सोमवार के दिन इस की अंगुलियों से पानी निकलता है।  ये पानी इस लिए निकलता है के इस ने अपनी दासी सुवैबा को आज़ाद किया था।  

सामान्य रूप से हर इस रिवायत को दलील बना कर कहा जाता है के मीलाद बना कर कहा जाता है के मीलाद शरीफ की खुशी मनाना श्रेष्ठ है।  इस सिलसिले में प्रश्न ये है के क्या ये हदीस सहीह है?  और हदीस की किस पुस्तक में है?  

जब इस रिवायत से मीलाद के अवसर पर खुशी मनाने के लिए दलील किया जाता है तो क्या सलफ सालेहीन में से किसी ने हज़रत सल्लल्लाहु तआ़लाअ अलैहि वसल्लम की विलादत पर खुशी के जाइज़ होने पर इस हदीस से दलील किया है?
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Answer:     आप ने जिस हदीस का वर्णन किया वह सहीह है।  सहीह बुखारी में ये रिवायत वर्णन है।  सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की मुबारक विलादत सारी कायनात के लिए विसाल वरदान है।  विशाल वरदान व नेअ़मत पर प्रसन्नता का प्रदर्शन करना, फितरत के अनुसार है।  

जो व्यक्ति सरकार सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के धन्य जन्म के अवसर पर खुशी का प्रदर्शन करता है अल्लाह तआ़ला इसे प्रचुर पुण्य प्रदान करते हैं।  सहीह बुखारी अन्य कई हदीसों के पुस्तकों में शब्द के अंतर के साथ रिवायत वर्णन है।  रिवायतों में सारांश है और कुछ में विस्तार है।  सहीह बुखारी, जिल्द 2, पः 764 की रिवायत के शब्द ये हैः-

भाषांतरः- हज़रत अ़रवह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैः सुवैया अबु लहब की दासी है।  अबु लहब ने इन्हें आज़ाद किया था और वह हज़रत नबी पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम को दूध पिलाइं।  जब अबु लहब मर गया तो इस के परिवार वालों में किसी ने सपने में इसे दुष्ठतर स्थिति में देखा।  

इस से कहा तू ने क्या पाया?  अबु लहब ने कहाः मैं ने तुम लोगों से जुदा होने के बाद कुछ विश्राम नहीं पाया।  सिवाए यह के सुवैया को आज़ाद करने के कारण से अंगुलि से सैराब किया जाता हुँ।  

(सहीह बुखारी, जिल्द 2, पः 764)  

इस रिवायत की शरह करते हुए सहीह बुखारी के साहित्यकार अल्लामा बद्रु उद्दीन ऐ़नी हनफी और हाफिज़ इब्न हज्र असखलानी शाफअ़ आदि रहीमुल्लाहि तआ़ला अपनी अपनी शरह में अन्य हदीसों की पुस्तकों के हवाले से विस्तार रिवायत लिखते हैं।  

हम यहाँ हाफिज़ इब्न हज्र असखलानी शाफअ़ रहमतुल्लाहि अलैह की शरह फत्हुल बारी, जिल्द 14, पः 45 से व्याख्या करते हैं-

भाषांतरः- हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैं के जब अबु लहब मर गया तो मैं ने एक वर्ष के बाद सपने में इसे दुष्ठतर स्थिति में देखा तो इस ने कहाः मैं तुम से जुदा होने के बाद अब तक राहत नहीं पाया।  किन्तु हर सोमवार के दिन मुझ से अज़ाब हलका किया जाता है।  

हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैं वह इस लिए के हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का सोमवार के दिन जन्म हुआ था और सुवैया ने अबु लहब को आप के पावन जन्म की शुभ-सूचना दी तो इस ने इन्हें आज़ाद कर दिया।  

(फत्हुल बारी, किताबुल निकाह, जिल्द 11, पः 381- ये रिवायत अनेक शब्द के साथ निम्नलिखित हदीसों की पुस्तकों में वर्णन भी हैः सुनन कुबरा, लिल बैहखी, किताबुल निकाह, हदीस संख्याः 14297 / मुसन्नफ अबदुर रज़्ज़ाख, किताबुल मनासिक, जिल्द 7, हदीस संख्याः 13955 / कंज़ुल उ़म्माल, हदीस संख्याः 35490)  

समुदाय के विद्वानों में हाफिज़ शम्स उद्दीन इब्न जुज़री और हाफिज़ शम्स उद्दीन बिन नासेर उद्दीन दमिश्की रहमतुल्लाहि अलैह ने सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की विलादत के अवसर पर खुशी मनाने और प्रसन्नता व आनन्द का प्रदर्शन करने पर इस रिवायत से दलील किया है।  

हाफिज़ शम्स उद्दीन बिन नासेर उद्दीन दमिश्की अपनी किताब मौरुदुल सादी फी मौलिद हादी में लिखते हैः-

भाषांतरः- ये सहीह रिवायत है के अबु लहब ने हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की विलादत पर खुश हो कर सुवैया को आज़ाद किया।  इस के कारण अबु लहब से सोमवार के दिन नरक के अज़ाब में छूट दी जाती है फिर इन्हों ने शेर पढे।  इस का अनुवाद ये है जब ये (अबु लहब) काफिर है जिस के अनादर में सुरह तब्बत यदा प्रकट हुई और वह हमेशा नरक में रहने वाला है।  

अतः अगमज मुजतबा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की मीलाद पर खुश होने के कारण से हमेशा हर सोमवार के दिन इस से अज़ाब में छूट की जाती है तो उस बन्दे के अधिकार में किस प्रकार पण्य का गुमान किया जाए जो जीवन भर अहमद मुजतबा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के मीलाद की खुशी मनाया और इ़मान की स्थिति में देहान्त कर गया।  

अधिक इस का वर्णन शरह अल मवाहिब ज़ुरखानी, जिल्द 1, पः 261 और सुबूलुल हुदा वर्रिशाद, जिल्द 1, पः 367 में उपलब्ध है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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