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فتاویٰ > विश्वास > पैगम्बरों पर विश्वास

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f:1238 -    क्या मीलादुन नबी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम बनाना जाइज़ है?
Country : जद्दह, सऊदी अरब,
Name : मुहम्मद अबदुल सलाम
Question:     क्या मीलादुन नबी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम बनाना जाइज़ है?
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Answer:     सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के धन्य विलादत सारी कायनात के अधिकार में विशाल वरदानों है और अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- आप फरमा दीजिए के अल्लाह के अनुग्रह और उसकी दया पर ही प्रसन्नता मनाएं।  

(सुरह यूनुसः 10: 58)  

इस विशाल वरदा पर प्रसन्नता व खुशी का प्रदर्शन करना मानव की अपेक्षा है।  जो व्यक्ति सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के पावन जन्म के अवसर पर प्रसन्नता का प्रदर्शन करता है अल्लाह तआ़ला इसी विशाल पुण्य व वरदान प्रदान करता है।  

सहीह बुखारी और अन्य कई हदीसों की पुस्तकों में शब्द के अंतर के साथ रिवायत वर्णन है।  कुछ रिवायतों में संक्षेप और कुछ में तफसील है।  सहीह बुखारी जिल्द 2, पः 764 की रिवायत के शब्द यह हैः-

भाषांतरः- हज़रत उ़रवह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैं, सुवैबा- अबु लहब की दासी है।  अबु लहब ने इन्हें अज़ाद किया था और वह हज़रत नबी पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम को दूध पिलाएं।  जब अबु लहब मर गया तो इस के परिवार वालों में किसी ने उत्तर में इसे बदतरीन व दुष्टतर स्थिति में देखा।  

इस से कहाः तून ने क्या पाया?  अबु लहब ने कहाः मैं ने तुम लोगों से जुदा होने के बाद कुछ विश्राम नहीं पाया, सिवाए ये के सुवैबा को आज़ाद करने के कारण से इस (अंगुली) से सैराब किया जाता हुँ।  

(सहीह बुखारी, किताबुल निकाह, जिल्द 2, पः 764, हदीस संख्याः 4711)  

इस रिवायत की शरह करते हुए व्याख्याता सहीह बुखारी अल्लामा बद्र उद्दीन ऐ़नी हनफी और हाफिज़ इब्न हज्र अ़सखलानी शाफअ़ आदि रहमतुल्लाहि अलैह अपनी-अपनी शरह में अन्य हदीसों की पुस्तकों के हवाले से तफसीली रिवायत लिखते हैं।  

हम यहाँ अल्लामा बद्र उद्दीन ऐनी हनफी रहमतुल्लाहि अलैह की सरह उ़मदतुल खारी जिल्द 14, पः 45 से सन्दर्भ अनुवाद करते हैः-

भाषांतरः- हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैं के जब अबु लहब मर गया तो मैं ने एक वर्ष के बाद सपने में इसे दुष्टतर स्थिति में देखा तो इस ने कहाःमैं तुम से जुदा होने के बाद अब तक राहत नहीं पाया कि्नतु हर सोमवार के दिन मुझ से यातना व अज़ाब हलका किया जाता है।  
हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैं वह इस लिए के हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम सोमवार के दिन जन्म हुए और सुवैबा ने अबु लहब को आप के पावन जन्म की शुभ-सूचना दी तो इस ने इन्हें अज़ाद कर दिया।  

(उ़मदतुल खारी, किताबुल निकाह, जिल्द 14, पः 45)  

ये रिवायत अनेक शब्द के साथ निम्नलिखित में वर्णन हदीसों की पुस्तक में भी वर्णन हैः-

सुनन कुबरा, लिल सुयूती, किताबुल निकाह, हदीस संख्याः 14297
मुसन्नफ अबदुर रज़्ज़ाख, किताबुल मनासिक, जिल्द 7, हदीस संख्याः 13546
जामअ़ अल हादीस, हदीस संख्याः 43545
कंज़ुल उ़म्माल, जिल्द 6, हदीस संख्याः 15725

सलफ सालेहीन व समुदाय के विद्वानों में हाफिज़ शम्स उद्दीन इ़ब्न जज़री ने और हाफिज़ शम्स उद्दीन बिन नासेर उद्दीन दमिश्की रहमुल्लाहि तआ़ला ने सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्म के जन्म के अवसर पर खुशी मनाने और प्रसन्नता व आनन्द का प्रदर्शन करने पर इस रिवायत से दलील की है।  

हाफिज़ शम्सउद्दीन बिन नासेर उद्दीन दमिश्की फरमाते हैः-

भाषांतरः- ये सहीह रिवायत है के हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के पावन जन्म पर खुश हो कर सुवैबा को आज़ाद करने के कारण से अबु लहब से सोमवार के दिन नरक व दोज़ख के अज़ाब में छूट की जाती है फिर इन्हों ने शेर पढ़े।  इस का स्थानांतर ये हैः-

जब ये (अबु लहब)काफिर है जिस की अनादर में “सुरह तब्बत यदा” प्रकट हुई और वह हमेशा नरक में रहने वाला है तो अहमद मुजतबा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की मीलाद पर खुश होने के कारण से हमेशा प्रत्येक सोमवार के दिन इस से अज़ाब में छूट की जाती है तो इस बन्दे के अधिकार किस प्रकार सवाब व पुण्य का गुमान किया जाए जो जीवन भर अहमद मुजतबा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के मीलाद की खुशी मनाया और इमान की स्थिति में देहान्त किया।  

उपर्युक्त वर्णन के अतिरिक्त शरह मवाहिब लिल ज़ुरखानी, जिल्द 1, पः 261, और सुबूलुल हुदा वर्रिशाद, जिल्द 1, पः 367, में उपलब्ध हैः-

अधिक इब्न अबदुल वह्हाब नजदी के बेटे शेख अबदुल्लाह बिन मुहम्मद बिन मुहम्मद बिन अबदुल वह्हाब ने अपनी पुस्तक मुक़तसर “सीरह अर रसूल सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम” में लिखा हैः-

भाषांतरः- अबु लहब की अज़ाद की हुई दासी सुवैबा को हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के सेवा की कृपा मिली।  अबु लहब ने इन्हें इस समय आज़ाद किया था जिस समय इन्हों ने इसे सरकार सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के पावन जन्म की गवाही सुनाई थीं।  

और अबु लहब के मरने के बाद इसे सपने में देखा गया, इस से पूछा गया के तेरी क्या स्थिति है?  तो इस ने कहाः मैं अज़ाब में हुँ किन्तु प्रत्येक सोमवार के दिन मुझ से अज़ाब हलका किया जाता है।  और मैं अपी इन दोनों अंगुलियों के बीच पानी चूसता हुँ (इस ने अपनी अंगुली के पूर की ओर इशारा किया) और ये सुवैबा को इस अवसर पर आज़ाद करने की बरकत है जिस समय इस ने मुझे नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के जन्म की गवाही दी थी और सेवा की कृपा प्राप्त की थी।  

शेख अबदुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अबदुल वह्हाब ने इस रिवायत से मीलाद पर पुण्य पर दलील देते हुए अल्लामा इब्न जूज़ी का कथन व्याख्या किया हैः-

भाषांतरः- इब्न जूज़ी ने कहाः जब काफिर अबु लहब के जिस के अनादर में क़ुरान करीम की सुरत प्रकट हुई इसे नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के पावन जन्म की रात खुश होने पर पुण्य दिया जा रहा है तो आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) की विलादत पर प्रसन्नत का प्रदर्शन करता है तो वह किस प्रकार आभूषण किया जाएगा।  

(मुक़तसर सीरह अर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम बिन मुहम्मद बिन अबदुल वह्हाब, जिल्द 1, पः 10)  

मुक़तसर सीरह अर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम बिन मुहम्मद बिन अबदुल वह्हाब, जिल्द 1, पः 16/17)  

विशेष रूप से मीलाद शरीफ के दिन प्रबन्ध करना खुद हुज़ूर नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के धन्य कर्म से साबित है।  अर्थात सहीह मुसलिम में हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबु खतादह अन्सारी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है के हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से सोमवार के दिन रोज़े के संबंधित पूचा गया तो आप ने आदेश फरमायाः

ये मेरी (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) विलादत का दिन है और इसी दिन मुझ पर क़ुरान प्रकट किया गया।  

(सहीह मुसलिम, किताबुल सियाम, हदीस संख्याः 1978)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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