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فتاویٰ > विश्वास > पैगम्बरों पर विश्वास

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f:1230 -    सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की ओर भूल का संबंध करना कैसा है?
Country : उत्तर प्रदेश, बिहार,
Name : अबदुर रहमान
Question:     एक विद्वान कहते हैं के सरकार दो आ़लम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से भूल हो सकती है, क्या ये श्रेष्ठ है?
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Answer:     अल्लाह तआ़ला अपने हबीब पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से वचन फरमाया के हम आप को पढाएंगे, फिर आप नहीं भूलेंगे।  अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-  

भाषांतरः- हम आप को पढाएंगे तो आप नहीं भूलेंगे परन्तु जो अल्लाह तआ़ला चाहे।  

(सुरह अल आ़लाः 87:06)  

हदीस शरीफ में सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की ओर नुसयान की निसबत वर्णन हुई, किन्तु ये सच्चाई भूलना नहीं है जिस प्रकार सामान्य रूप से मानव भूलता है।  बल्कि हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने इस से संबंधित स्पष्टीकरण के सात आदेश फरमाया के मेरा ये कर्म केवल इस लिए होता है के तुम्हें शिक्षा दुँ के भूलने की स्थिति में इस कर्म की तलाफी किस प्रकार की जाए।  नुसयान के बाद क्या तरीक़ा अपनाया जाए, जैसा के मौता इ़माम मालिक, पः 68 में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- इ़माम मालिक रहमतुल्लाहि अलैह से वर्णित है इन्हें ये हदीस पहुंची के हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः मैं इस लिए भूलता या भुलाया जाता हुं के तुम्हें तरीक़े बतलाउँ।  और शिफा शरीफ, पः 335 में ये शब्त हैः भाषांतरः- मैं सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम नहीं भूलता।  

किन्तु भुलाया जाता हुं ताकि मेरी (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) सुन्नत मालूम हो।  

ये बात बुद्धि व सोंच के अनुसार से भी श्रेष्ठ है क्यों के अल्लाह तआ़ला ने नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम को अपने अहकाम व प्रावधान पहुंचाने के लिए निश्चय फरमाया।  यदि सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम साधारण लोगों के प्रकार भूलते तो इसलाम के विरोधी का इसलामी शिक्षण पर विरोध होता के नबी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम कुछ अहकाम भूल गए हैं।  

हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का बाह्म रूप से नुसयान जैसा कर्म समुदाय की शिक्षा के लिए और अल्लाह के सन्देश के प्रसारण के लिए होता है।  

मुफस्सिरीन किराम ने उपर्युक्त वर्णन आयत के यर्थाथ विस्तार व तफसीरें की हैः

(1)- रूहुल मआ़ने के लेखक अ़ल्लामा मुहम्मद बिन अबदुल्लाह हुसैन अल वसी रहमतुल्लाहि अलैह इस की तफसरी में फरमाते हैं के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से नुसयान संबंधित नहीं होता।  

भाषांतरः- अल्लाह का आदेश “फला तन्सी” (आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) नहीं भूलेंगे) से आप की पावन जात से संबंधित नुसयान की नफी उद्देश्य है इस में अल्लाह तआ़ला की ओर से आप पर अनुग्रह का प्रदर्शन है के आप को हाफिज़े की विशाल शक्ति प्रदा की गई है।  

मुसलिम की शरह के लेखक इ़माम नववी रहमतुल्लाहि अलैह ने अनेक अर्थ वर्णन करने के बाद अल्लामा खाज़ी अयाज़ रहमतुल्लाहि अलैह के हवाले से इस अर्थों में तफसीली उद्धरण व्याख्या की हैः-

भाषांतरः- और सत्य बात जिस में कोई सन्देह नहीं, इन लोगों के लोकोक्ति को अधिमान देना है, जो अंबिया किराम अलैहिस सलाम के बारे में सम्पूर्ण अक़बार में नुसयान को निषिद्ध घोषित देते हैं।  जिस प्रकार इनसे किसी सूचना का घटना विरुद्ध होना जाइज़ नहीं।  ना जानबूझकर ना अनजाने में ना संतुष्टि की स्थिति में ना क्रोध की स्थिति में, और इस बारे में तुम्हें ये बात काफी है के हमारे नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का पावन जीवन वृत, मुबारक कलाम, बावजूद सम्मान से वर्णन किया जाता है।  सन्तोष, विरुद्ध, इमान वाला और शक करने वाला अपनाता है तो कोई व्यक्ति इन में से किसी चीज़ में, किसी लोकोक्ति में गलती नहीं देखा और ना किसी कलिमे से संबंधित वहम की संकेतक किया, यदि गलती या वहम होता तो अवश्य व्याख्या करता जिस प्रकार आप का नमाज़ से संबंधित सहू व नौम व्याख्या है।  

(शरह मुसलिम अन नववी, जिल्द 1, पः 212)  

(2)- अल्लामा खाज़ी अयाज़ रहमतुल्लाहि अलैह फरमाते हैं के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से सहू हुआ है नुसयान नहीं।  सहू का अर्थ किसी चीज़ की ओर ध्यान ना होना है, जैसा के शिफा शरीफ जिल्द 2, पः 139 में है और सबूलुल हुदा वर्रिशाद, जिल्द 11, पः 468 में इन शब्त का समावेश हैः-

दूसरा ध्यान जिस को मैं ने कुछ मशाइक़ के किलाम से लेना है के हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से सहू हुआ नुसयान नहीं हुआ।  इस लिए के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने अपनी जात से नुसयान की नफी फरमाई है।  

क्यों के नुसयान वाफ्त की उपेक्षा है और आप इस से पवित्र व शुद्ध हैं और सहू तो कमाल असतग़राख व महूयित की बिना वुखूअ़ होता है।  

(3)- तीसरा अर्थ ये है के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से नुसयान नहीं होता परन्तु जो अल्लाह तआ़ला चाहे और ये परिस्थिति अत्यन्त कम व कभी पेश आई और ये भी सच्चाई में शरीअ़त के प्रसारण के कार्य व वाजिबात में नहीं हुआ बल्कि शिष्टाचार व सुनन में हुआ क्यों के यदि सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम वाजिबात में से कुछ भूल जाएं और याद ना आए तो शरीअ़त में खलल का कारण है और ऐसा नहीं हो सकता जैसा के तफसीर कबीर के सुरह अल आ़ला में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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