***** For other Fatawa, please click on the topics on the left *****



विषय की सूची

فتاویٰ > विश्वास > पैगम्बरों पर विश्वास

Share |
f:1229 -    हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु के शब्द मात्र
Country : हैद्राबाद, भारत,
Name : अत्थर खान
Question:     एक रिवायत सुनने में आई है के नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के चाचा जान अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने आप के सामने कुछ लोकोक्ति व शब्द मात्र पढे।  तो आप सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने इन के लिए दुआ़ फरमाई।  कृपया उत्तर प्रदान करें के सम्पूर्ण रिवायत कया है और कौनसी पुस्तक में है?
............................................................................
Answer:     इ़माम हाकिम की मुसतदरक, इ़माम तबरानी की मुअ़जम कबीर और अल्लाब हैसमी की मजमअ़ उज़ ज़वाईद में इस संबंधित रिवायतें व्यख्या हैं के तबूक के युद्ध से वापसी के समय सैयदना अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से आप की प्रशंसा व स्तुति और गुणगान करने की आज्ञा की इच्छा चाही।  

सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने दुआ़ओं से नवाज़ते हुए आज्ञा प्रदान की तब हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने अनुवाक्य व शब्द पात्र पढे।  

इ़माम हाकिम की पुस्तक मुसतदरक अ़ला सहिहैन से हदीस शरीफ को व्याख्या किया हैः-

भाषांतरः- हज़रत खुरैम बिन औस बिन हारिसा बिन लाम रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैः  मैं तबूक के युद्ध से वापसी के समय अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की ओर प्रवास किया और इसलाम से आभूषण हुआ मैं ने हज़रत अब्बास बिन अबदुल मुत्तलिब रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु को नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की पावन सेवा में ये विनती हुए सुनाः या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम!  चाहता हुँ के आप की प्रशंसा व स्तुति और गुणगान करुँ तो रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः आप प्रशंसा किजीए अल्लाह तआ़ला के चहरे को ज़ीनत बख्शे, हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने शब्द मात्र कहे, कुल इन के कुछ शे ये हैं जब आप का धन्य जन्म हुआ तो धरती दीप्तिमान व प्रफुल्ल हो गई और आप के नूर मुबारक से सर्व संसार चमकदार हो गए।  

(मुअजम कबीर तबरानी, हदीस संख्याः 4057 / मुसतदरक अ़ला सहिहैन, हदीस संख्याः 5426 / मजमअ़ अज़ ज़वाइद जिल्द 8, पः 217)  

अधिक मुअ़जम तबरानी और मजमअ़ अज़ ज़वाइद में ये शेर वर्णन हैः तू हम इस रोशनी में और इसी नूर में हिदायत के रास्ते सरकर रहे।  मुसतदरक के शब्द में لايفضفض के शब्द हैं और मुअ़जम कबीर और मजमअ़ अज़ ज़वाइद में لا يفضض मरवी है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
All Right Reserved 2009 - ziaislamic.com