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فتاویٰ > इबादत > हज्ज का विवरण

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f:1215 -    हज्ज फर्ज़ होने के बाद विलम्भ करने का आदेश
Country : गोलकुंडा, हैद्राबाद,
Name : मुहम्मद अबदुल नई़म
Question:     मै जिन लोगों से मिलता हुए इन में एक व्यक्ति हैं, अलहमदुलिल्लाह इन के पास काफी कुछ दौलत है एवं हज्ज भी फर्ज़ हो गया किन्तु वे प्रत्येक वर्ष टालते जाते हैं।  कहते हैं मैं बाद में हज्ज करलुंगा।  हज्ज फर्ज़ होने के बाद विलम्भ करने का क्या आदेश है? वर्णन करे!
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Answer:     हज्ज प्रत्येक व्यक्ति जो सामर्थ्य रखते हों इन पर जीवन में एक बार फर्ज़ है।  हज्ज फर्ज़ होने के बाद हज्ज में विलम्भ ना की जाए।  इस इसलामी फर्ज़ के संपादन में जल्दी करें।  जैसा के सुनन अबु दाउद में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबदुल्लाह इ़ब्न अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है आप ने फरमाया के हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः जो व्यक्ति हज्ज का उद्देश्य व इरादा रखता हो वह उस को संपादन करने में जल्दी करे।  

(सुनन अबु दाउद, किताबुल मनासिक, हदीस संख्याः 1734)  

ह्ज्ज फर्ज़ होने के बाद बिना किसी शरन तकलीफ विलम्भ करना श्रेष्ठ नहीं।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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