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فتاویٰ > इबादत > हज्ज का विवरण

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f:1214 -    हज्ज किस पर फर्ज़ है?
Country : वारानसी,
Name : अलीम उद्दीन
Question:     मुफती साहब!  हज्ज के बारे में ये सुनने में आया है के सक्षम रखने वाले पर हज्ज फर्ज़ है।  किन्तु सक्षम रखने वाला किस को कहते हैं?  क्या ज़कात देने वाले को सक्षम रखने वाले को कहते हैं?  फिर इस का क्या तात्पर्य है?  

कुछ लोगों के पास जायदाद बडी होती हैं, वह इस का व्यापार नहीं करते, क्या ऐसे लोगों पर हज्ज फर्ज़ होगा या नहीं?  यदि किसी के पास राशि व रक़्म ना हो एवं जायदाद हो तो क्या इस पर हज्ज फर्ज़ होगा?  उत्तर देने पर बड़ी कृपया होगी?
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Answer:     हज्ज के बारे में अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः

भाषांतरः- और अल्लाह तआ़ला के लिए लोगों पर बैतुल्लाह का हज्ज फर्ज़ है, उन पर जो स तक पहुंचने की सामर्थ्य प्राप्त रखते हों।  

(सुरह आ़ल इ़मरानः 03:97)  

जामेअ़ तिरमिज़ी में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबदुल्लाह बिन उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है इन्हों ने फरमायाः एक व्यक्ति हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की पावन सेवा में उपस्थित हो कर निवेदन करने लगे- या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम!  हज्ज को क्या चीज़ व वस्तु वाजिब (अनिवार्य) करती है?  सरकार सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः यात्रा के लिए तोशा और सवारी।  

(जामेअ़ तिरमिज़ी, किताबुल हज्ज, हदीस संख्याः 818)  
फुक़्हा किराम (इसलामी धर्मशास्त्र) ने इस की इस प्रकार अनुवाद किया है के जिस व्यक्ति के पास बुनियादी व आधारिक अवश्यकता से अधिक इस प्रकार धन हो के वे बैतुल्लाह शरीफ तक आने जाने एवं निवास करने के खर्च सहन कर सकता हो एवं हज्ज की यात्रा से वापस आने तक परिवार वालों का खर्चे का प्रबन्ध कर सकता हो तो वह व्यक्ति सामर्थ्य वाला है एवं इस पर हज्ज फर्ज़ है।  

ज़कात वाजिब होने के लिए अन्य शर्तों के साथ निसाब (निर्धारित राशि) का मालिक होना, धन का बड़ने वाला होना एवं निसाब पर 1 वर्ष गुज़रना, शर्त है, हज्ज वाजिब होने के लिए धन के बढ़ने या इस पर वर्ष गुज़रने की शर्त नहीं एवं ना निसाब का सम्पूर्ण अनिवार्य है, केवल बुनियादी अवश्यकता तथा परिवार वालों के खर्चे से अधिक इतनी राशि हो के बैतुल्लाह शरीफ जाने आने के खर्चों को सहन कर सकता हो तो हज्ज फर्ज़ हो जाता है।  

विषयासक्त व विलासिता घर के अतिरिक्त जायदाद हो एवं इस को बेचने से इतनी राशि प्राप्त होती है के व वापसी तक परिवार के खर्चे का प्रबन्ध कर के हज्ज के सम्पूर्ण खर्चों को सहन कर सकता है तो ऐसे व्यक्ति पर हज्ज फर्ज़ है।  जैसा के फतावा आलमगिरी, किताबुल मनासिक में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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