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فتاویٰ > इबादत > हज्ज का विवरण

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f:1211 -    मखाम इबराहीम के तवाफ के बाद दो रकात नमाज़ किस स्थान पर संपादन करना उत्तम है
Country : राइचूर, कर्नाटक, भारत,
Name : सिद्दीख हसन
Question:     कअ़बे के तवाफ करने के बाद हाजी लोग जब मखाम इबराहीम के पास तवाफ के दो रकात पढने के लिए जाते हैं तो बहुत कम समय ऐसा होता है के मखाम इबराहीम के पास नमाज़ संपादन करने के लिए स्थान हो वरना अधिकर मौक़ा नहीं मिलता।

इस समय हाजी लोग को क्या करना चाहिए?  जब वह मखाम इबराहीम के पास नमाज़ संपादन नीं कर पाते तो तवाफ के दो रकात किस स्थान पर पढने में उत्तमता है?
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Answer:     2 रकात नमाज़ वाजिब तवाफ है।  श्रेष्ठतर व उत्तम ये है के 2 रकात तवाफ मखाम इबराहीम के पीछे संपादन किया जाए।  फुक़्हा किराम ने 2 रकात नमाज़ तवाफ के समापन के लिए उत्तमता के अनुसार से तरतीब वार स्थान निम्नलिखित स्पष्ट की है- तवाफ के दो रकातः

(1)- मखाम इबराहीम के पीछे संपादन करना उत्तम है।  

(2)- इसके बाद कअ़बा शरीफ के भीतर पढने में उत्तमता है।  

(3)- फिर हतीम कअ़बा में मीज़ान रहमत के नीचे।  

(4)- फिर इसके निकट भाग में।  

(5)- फिर बाखी हतीम में।  

(6)- फिर कअ़बा शरीफ के निकट।  

(7)- फिर मसजिद हराम में जहाँ हो सके।  

(8)- फिर हरम शरीफ में जहाँ मौक़ा उपलब्ध दिखे।  

अर्थात मखाम इबराहीम के पीछे 2 रकात तवाफ पढने की सम्भावना ना हो तो वर्णन उपर्युक्त तरतीब वार स्थान में से किसी स्थान पर सुविधा व सम्भावना के अनुसार वाजिबुल-तवाफ संपादन कर ली जा सकती है।  

जैसा के रद्दुल मुहतार, जिल्द 2, पः 185 में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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