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فتاویٰ > इबादत > हज्ज का विवरण

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f:1210 -    मुज़दलिफा पहुंचने से पूर्व इ़शा का समय समाप्त हो जाने का संदेह हो
Country : हुमायुन नगर, हैद्राबाद,
Name : शमीम अनवर
Question:     विश्व के कई एक देशों से मुसलमान हज्ज बैतुल्लाह के लिए जाते हैं एवं प्रत्येक वर्ष हाजी लोग की संख्या में समावेशन (इज़ाफा) हो रहा है, हरमैन शरीफ में हज्ज के अवसर पर हाजी लोग के आगमन के लिए विशेष प्रबन्ध होते हैं।  क्यों के अज़दहाम बहुत अधिक होता है इस लिए विशेष प्रबन्ध के बावजूद सम्पूर्ण हाजी लोग नमाज़ इ़शां के समय तक अ़रफात से मुज़दलिफा नहीं पहुंच सकते।  

कभी-कभी ये भी देखने में आया है के वाहनचालक (ड्राइवर) खूब घुमा कर हाजी लोग को मुज़दलिफा से काफी दूर छोड़ दिए, इस के बाद हाजी चलते रहे चलते रहे यहाँ तक के बहुत अधिक विलम्भ हो गई।  विनती है के जो हाजी लोग ऐसी मजबूरी के कारण से मुज़दलिफा ना पहुंच सकें एवं मुज़दलिफा पहुंच ने में इ़शा का समय समाप्त हो जाने का संदेह हो तो इन्हें नमाज़ के सिलसिले में क्या करना चाहिए?

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Answer:     9 ज़िल हिज्जा को वुखूफ अ़रफा के बाद मग़रिब नमाज़ का समय हाजी लोग के लिए सूर्यास्त होने के बाद शुरु नहीं होता बल्कि इ़शा का समय मुज़दलिफा में प्रवेश होने के बाद शुरु होता है।  अर्थात शरीअ़त का आदेश ये है के हाजी मुज़दिफा पहुंच कर इ़शा का समय शुरु होने के बाद मग़रिब व इ़शा एक अज़ान एक इखामत के साथ संपादन कि नियत से पढें।  

अतः अज़दहाम व अन्य किसी तकलीफ के बिना यदि ये संदेह हो के मुज़दलिफा पहुंचने तक इ़शा का समय समाप्त हो जाएगा तथा सुबह सवेरे उभर जाएगा तो रास्ते में या जहाँ कहीं हों मग़रिब व इ़शां समापन कर लें।  फुक़्हा किराम ने स्पष्टीकरण की है के जब मग़रिब व इ़शा को जमा करने का समय समाप्त होने का संदेह हो तो असल नमाज़ समय में संपादन कर लेना अवश्य है।  जैसा के मनासिक मुल्ला अ़ली खारी, पः 238 में हैः-

यदि इ़शा का समय समाप्त होने से पूर्व मुज़दलिफा पहुंच जाएं तो इन्हें मग़रिब व इ़शा दोहराना अवश्य है।  जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 1, पः 230 में है।  

अतेत इन्हें तुरंत जितनी जल्दी हो सके वुखूफ वाजिब के लिए मुज़दलिफा पहुंचना अवश्य है।  वुखूफ मुज़दलिफा सुबह सवेरे से सूर्योदय से पूर्व तक एक पल व क्षण के लिए भी क्यों ना हो पहुंचना वाजिब (अनिवार्य) है।  
जिस के छोड़ने पर दम देना अनिवार्य है।  

जो हाजी लोग वुखूफ अ़रफा के बाद आवागमन व यातायात (ट्रैफिक) की मजबूरी के कारणया राह भटकने के कारण सूर्योदय से पूर्व तक मुज़दलिफा ना पहुंच सकें इन पर वाजिब तर्क व छूटने के कारण दम देना अनिवार्य है।  जैसा के फतावा आलमगिरी जिल्द 1, पः 230 में और जैसा के फतावा आलमगिरी जिल्द 1, पः 247 में और फतावा आलमगिरी जिल्द 1, पः 231 में है।  एवं जैसा रद्दुल मुहतार, जिल्द 2, पः 194 में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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