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فتاویٰ > इबादत > हज्ज का विवरण

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f:1206 -    12 ज़िल हिज्जा तक सई़ ना की जा सके तो क्या आदेश है?
Country : बंजारा हिल्स, रोड़ नः 12,
Name : अबदुल करीम
Question:     हज्ज में तवाफ ज़ियारत के बाद जो सई़ की जाती है यदि कोई हाजी साहब 12 ज़िल हिज्जा के सूर्यास्त तक ना करें तो कया इन्हें इस समय में सई़ ना करने के कारण से कफ्फारह देना या दम देना अवश्य है?
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Answer:     सई़ के श्रेष्ठ व उचित होने के शर्तों में एक शर्त ये है के तवाफ के ाद सई़ की जाए व अधिक तवाफ सम्पूर्ण कर के 2 रकात तवाफ से मुक्त होने के तुरंत सई़ के बाद करना सुन्नत है, जैसा के सहीह बुखारी जिल्द 1, किताबुल मनासिक, पः 232 मे हैः  

भाषांतरः- इ़ब्न जुरैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु, उ़मर इ़ब्न दीनार रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित करते हैं, इन्हों ने वर्णन किया केमैं ने हज़रत अबदुल्लाह बिन उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु को फरमाते हुए सुना के हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम मक्के में उजागर हुए तो आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) ने बैतुल्लाह शरीफका तवाफकिया फिर 2 रकात नमाज़ तवाफ संपादन किया इस के बाद सफा व मरवह के बीच इ़ब्न उमर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने .ये वर्णन करते सई किया फिर आयत की तिलावत की।  

भाषांतरः- निश्चय अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) का धन्य व पावन जीवन में तुम्हारे लिए एक सर्वश्रेष्ठ आदर्श है।  

(सुरह अल अहज़ाबः 33:21)  

इस हदीस पाक के आधार में तवाफ और वाजिब तवाफ के बाद विस्तार रूप से सई़ करना सुन्नत घोषित किया गया है दि तवाफ के बाद ताज़ा दम होने के उद्देश्य से या किसी और तकलीफ के कारण से अंतराल ले कर सई़ की जाए तो शरन कोई समस्या नहीं।  

यदि बिना किसी तकलीफ के असामान्य विलम्भ की जाए तो ये कर्म मकरुह (निषिद्ध) और बुरा है।  अतः विलम्भ करने वाले के ज़िम्मे कफ्फारा या दम अनिवार्य नहीं।  

जैसा के रद्दुल मुहतार, जिल्द 2, किताबुल हज्ज, पः 185 में है और मनासिक मुल्ला अ़ली खारी, मअ़ हाशिय इरशादुल सारी, पः 199 में है।  

यदि कोई साहब तवाफ करने के बाद 12 ज़िल हिज्जा के सूर्यास्त तक किसी तकलीफ के कारण सई़ ना कर सकें तो इन्हें इस के बाद सई़ कर लेनी चाहिए एवं यदि बिना किसी तकलीफ 12 ज़िल हिज्जा के सूर्योदय तक सई़ ना किए हों तब भी इन्हें सई करना अवश्य है।  अर्थात दो परिस्थिति इन के विलम्भ करना मकरुह है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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