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فتاویٰ > इबादत > हज्ज का विवरण

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f:1204 -    रमी के समय कंकडियों में अधिकता व कमी हो जाए तो क्या आदेश है?
Country : शाह अली बन्ड़ा, हैद्राबाद,
Name : अज़हर अली
Question:     मीना में जमरात को कंकडियां मारने के समय कभी संख्या में अंतर आ जाता है, यदि कोई व्यक्ति 7 कंकडियों से कम या अधिक कंकडियां मारदे तो इसे क्या करना चाहिए?
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Answer:     रमी जमरात हज्ज के वाजिबात (अनिवार्यता) से है, जिन जमरात की रमी की जाती है इन में से प्रत्येक की रमी के समय 7 का गणन सम्पूर्ण करना रमी का रुक्न (स्तम्भ) है।  अतः 4 या इस से अधिक कंकडियां मारनेसे भी ये रुक्न समापन हो जाता है।  3 या इस से कम कंकडियां मारी जाएं तो रमी का रुक्न संपादन नहीं होता।  

इसी लिए यदि किसी हाजी ने 3 या इस से कम कंकडियां मारी हों तो इनपर दम वाजिब व अनिवार्य होगा जिस प्रकार जानबूझकर रमी ना करने वाले पर वाजिब होता है।  यदि वे दोबारा 7 कंकडियां मार लें तो दम वाजिब ना होगा।  

इस प्रकार 4 या इस से अधिक कंकडियां मारी जाएं तो रमी का रुक्न संपादन हो जाएगा एवं दम वाजिब ना होगा।  अतः जितनी कंकडियां कम होंगी प्रत्येक के बदले सदखा वाजिब होगा।  

सदखे की संख्या गेहूं देने की स्थिति में आधा साअ़ यथा सवा किलो और जेउं या खजूर देना चाहें तो एक साअ़ यथा ढ़ाई किलो है।  एक साअ़ 2 किलो 212 ग्राम के बराबर होता है एवं आधा साअ़ 1 किलो 104 ग्राम के सक्षम होता है।  सावधानी के रूप से आधे साअ़ के लिए सवा किलो और एक साअ़ के लिए ढ़ाई किलो सदखा करना चाहिएं।  

उत्र भारत के विद्वानों के पास आधा साअ़ एक किलो 590 ग्राम एवं 1 साअ़ 3 किलो 180 ग्राम होता है।  जैसा के मनासिक मुल्ला अ़ली खारी, अहकामुल रमी व शराइ़त व वाजिबाता, पः 275, 277 और सदखे से संबंधित पः 436 में आया है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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