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فتاویٰ > इबादत > नमाज़ का विवरण

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f:1197 -    नमाज़ी के सामने से गुज़रने पर चेतावनी
Country : बीजापूर,
Name : मुहम्मद अबु बक्र
Question:     मैं ने नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाले के बारे में एक हदीस पाक सुनी के जो मानव नमाज़ी के सामने से गुज़रता है इस के लिए 40 दिन या 40 महीने या 40 वर्ष ठहरना अच्छा व उचित है।  इस के सम्मुख के वे नमाज़ी के सामने से गुज़र जाए मुझे ये मालूम करना है के सामने से ना गुज़रना 40 दिन से श्रेष्ठ है या 40 महीने से या 40 वर्ष से?  कृपा करके उत्तर अवश्य दीजिए।
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Answer:     ये हदीस पाक सहीह बुखारी, सहीह मुसलिम एवं हदीसों के अन्य किताबों में उपलब्ध है।  सहीह बुखारी शरीफ में हैः-

भाषांतरः- हज़रत बुस्र बिन सई़द से वर्णित है के हज़रत ज़ैद बिन खालिद रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने इन्हें हज़रत अबु जुहैम रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु के पास ये पूछने के लिए भेजा के इन्हों ने नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाले के बारे में हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से कया सुना है?  हज़रत अबु जुहैम रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने फरमायाः हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जानता के इस का कया पाप है तो अवश्य 40 तक ठहरना इस के नज़दीक श्रेष्ठतर होता के वे नमाज़ी के सामने से गुज़रे।  रावी हदीस अबु अल नसर कहते हैं मैं नहीं जानता इन्हों ने 40 दिन फरमाया या 40 महीने या 40 वर्ष।  

(सहीह बुखारी, हदीस संख्याः 510 / सहीह मुसलिम, हदीस संख्याः 1160 / सुनन अन निसा, हदीस संख्याः 755 / मुसनद इ़माम अहमद, हदीस संख्याः 18003)  

इस रिवायत में निश्चित रूप से ये वर्मन नहीं है के 40 वर्ष से कया तात्पर्य है।  किन्तु अल्लामा अ़ली बिन अबु बक्र हैसमी (देहान्तः 807 हिज्री) की मजमअ़ अज़ ज़वाइद, जिल्द 2, पः 61 की रिवायत में सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से निश्चिंत रूप से 40 वर्ष के शब्द व्याख्या है।  

नमाज़ के सामने से गुज़रना इस के लिए इस से श्रेष्ठतर है के वे 40 वर्ष ठहरा रहे।  

(मजमअ़ अज़ ज़वाइद, जिल्द 2, पः61)  

इ़माम अबु जाफर तहावी रहमतुल्लाहि अलैह ने मशकिल अल आसार में इसी अर्थ को वर्णन किया है।  

भाषांतरः- नमाज़ी के सामने से गुज़रना कठिन व घोर पाप है इस आदेश से उद्देश्य है के मानव इस घोर पाप का प्रदर्शन ना करे इस लिए अनुदेश के साथ इस से मना किया गया है।  

एक और रिवायत में 100 वर्ष का वर्णन भी आया है जैसा के मुसनद इ़माम अहमद (मुसनद अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु) में हदीस पाक है।  

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से वर्णित करते हैं आप ने आदेश फरमायाः यदि तुम में से कोई जानता के अपने (पढने वाले) भाईके सामने से चलने पर किस प्रकार बड़ा पाप है जब के वे अपने रब से मुनाजात कर रहा है तो 100 वर्ष इसी स्थान पर ठहरे रहना इस के पास नमाज़ी के आगे गुज़रने से श्रेष्ठतर होता।  

जैसा के उ़मदतुल खारी, जिल्द 3, पः 595 में आया है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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