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فتاویٰ > इबादत > नमाज़ का विवरण

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f:1196 -    मग़रिब से पूर्व 2 रकात नमाज़ का आदेश
Country : भारत,
Name : मुहम्मद इसमाइ़ल
Question:     मैं मेडकल (चिकित्सा) कॉलेज में लेकचरर (शिक्षक) हुँ।  मुझे परीक्षा के सिलसिले में ड्यूटी पर मद्रास जाने का मौक़ा मिला वहाँ मैं ने एक मसजिद में देखा के कुछ लोग मग़रिब की अज़ान के बाद फर्ज़ नमाज़ से पूर्व 2 रकात पढे और बाद में वे जमात में शरीक हो गए।
हैद्राबाद में मग़रिब की फर्ज़ पढने के बाद सुन्नत और नफ्ल नमाज़ पढते हैं।  मग़रिब की फर्ज़ से पूर्व तो कोई नमाज़ नहीं पढी जाती।  मैं ये जान्ना चाहता हुँ के कया मग़रिब की फर्ज़ से पूर्व भी कोई नफ्ल नमाज़ है। जैसे मग़रिब के बाद अवाबीन की नमाज़ पढी जाती है?  मैं उत्तर का प्रतीक्षारत हुँ, उम्मीद है के आप अवश्य उत्तर प्रदान करेंगे?
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Answer:     हनफी फिक़्ह की ओर से मग़रिब की अज़ान के बाद फर्ज़ नमाज़ से पूर्व कोई सुन्नत या नफ्ल नमाज़ नहीं।  हर नमाज़ की अज़ान और इखामत के बीच नमाज़ है किन्तु मग़रिब की अज़ान एवं इखामत के बीच कोई नमाज़ संपान करना नहीं है।  

अज़ान के तुरंत बाद फर्ज़ नमाज़ के लिए ठहरना मसनून (निर्धारित) व मुसतहब (श्रेष्ठतर) है।  जुजाजातुल मसाबीह जिल्द 1, पः 335 में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत हैय्यान बिन उबैदुल्लाह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु अपने पिती से वर्णित करते हैं के हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमाया- हर अज़ान व इखामत के बीच नमाज़ है सिवाए मग़रिब की नमाज़ के.  

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने मग़रिब की अज़ान एवं इखामत के बीच नमाज़ समापन नहीं की।  जैसा के ज़ुजाजातुल मसाबीह जिल्द 1, पः 336 में इ़माम मुहम्मद रहमतुल्लाहि अलैह की किताबुल असार के हवाले से हदीस पाक व्याख्या हैः-

भाषांतरः- हज़रत हम्माद से वर्णित है इन्हों ने कहाः मैं ने हज़रत इबराहीम नखई़ रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से मग़रिब से पूर्वन के संबंधित पूछा तो इन्हों ने मुझे इस से मना किया और फरमाया के हज़रत नबी करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम और हज़रत अबु बक्र व हज़रत उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हुमा ने ये नमाज़ नहीं पढ़ी।  

अन्य सहाबा किराम ने भी मग़रिब से पूर्व कोई नमाज़ संपादन नहीं की।  जैसा के ज़ुजाजातुल मसाबीह, जिल्द 1, पः 336 में सुनन अबु दाउद के हवाले से हदीस पाक वर्णन हैः-

भाषांतरः- हज़रत ताउस रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है, इन्हों ने फरमायाः हज़रत अबदुल्लाह बिन उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से मग़रिब से पूर्व 2 रकात के संबंधित पूछा गया तो इन्हों ने फरमायाः मैं ने हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के मुबारक दौर में किसी को ये 2 रकात समापन करते हुए नहीं देखा।  अर्थात मग़रिब की अज़ान के बाद फर्ज़ संपादन करने से पूर्व सुन्नत या नफ्ल के 2 रकात के रूप में पढ़ना मकरुह (निषिद्ध0 है।  

जैसा के हाशिय अल तहतावी अ़ला मुराखीअल फलाह पः 470 में है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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