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فتاویٰ > इबादत > नमाज़ का विवरण

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f:1192 -    नीयत के समय शब्द में परिवर्तन
Country : मासाब टैंक, हैद्राबाद, भारत,
Name : हुमैरा फातिमा
Question:     जब नमाज़ के लिए खड हो कर नीयत व उद्देश्य करते हैं तो कभी-कभी ऐसा होता है के दिल में एक नमाज़ की नीयत होती है और ज़बान से कुछ और शब्द निकल जाते हैं।  इस समय कौनसी नमाज़ होगी?  जबके ज़बान से जो शब्द निकले हम इस की नियत व उद्देश्य करना नहीं चाहते थे, कहने में गलती हुई।  विनती है के अवश्य उत्तर दें।
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Answer:     नियत व उद्देश्य का स्थान दिल है ज़बान नहीं।  ज़बान से केवल नियत का उच्चारण होता है ताकि दिल और ज़बान में समानता हो जाए।  और अधिक समरूपता व सदृश्यता प्राप्त हों।  इस लिए यदि ज़बान दिल के उद्देश्य व इरादे व नियत के समापन करने में छूट जाए और दिल से एक नमाज़ की नियत की हो एवं ज़बान से इस के अलग शब्द निकल जाए तो ऐसी स्थिति में शरीअ़त ने दिल की नियत का अनुसार व निर्भरता किया है।  

ज़बान के शब्द का नहीं क्यों के नियत के बाब में दिल का अ़मल माननीय नहीं।  

जैसा के दुर्रे मुकतार, जिल्द 1, पः 503 में हैः-

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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