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فتاویٰ > इबादत > नमाज़ का विवरण

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f:1191 -    नमाज़ इसलाम का विशाल स्तम्भ
Country : भारत,
Name : सई़दा
Question:     मुफती साहब नमाज़ को इसलाम का दूसरा स्तम्भ क्यों कहा गया?  इस बारे में कुछ तफसीर बतलाएं।
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Answer:     हज़रत नबी करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने इसलाम के अरकान व स्तम्भ फरमाते हुए नमाज़ को दूसरे दर्जे में वर्णन किया।  

सहीह बुखारी व सहीह मुसलिम में हदीस पाक उपस्थित हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना इब्न उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है, इन्हों ने फरमाया के इसलाम की नीव 5 चीज़ों पर रखी गई है।  इस बात की गवाही देना के अल्लाह तआ़ला के सिवा कोई मअ़बूद नहीं और हज़रत मुहम्मद मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम इस के बन्दे और इस के रसूल हैं और नमाज़ को पाबंदी से संपादन करना, एवं ज़कात देना और हज्ज करना और रमज़ान के रोज़े रखना।  

(सहीह बुखारी, हदीस संख्याः 08, सहीह मुसलिम, हदीस संख्याः 122)  

इसी लिए नमाज़ को इसलाम का दूसरा स्तम्भ कहा गया।  

नमाज़ का महत्व इस लिए है के अल्लाह तआ़ला ने इस इ़बादत को हम बर फर्ज़ किया है और क़ुरान करीम में जगह-जगह अनेक विषय व प्रमाणित रूप से नमाज़ का वर्णन फरमाया।  कहीं आदेश के रूप में फरमाया, कहीं सफल व सौभाग्यशाली बन्दों के लक्षण के रूप में तथा कहीं परहेज़गारों (धर्मनिष्ठ) के लक्षण के रूप में वर्णन किया गया है।  


नमाज़ हर मुसलमान पुरुष व महिला, धनी व ग़रीब, स्वस्थ्य व रोगी, निवासी व यात्री सब पर फर्ज़ है।  नमाज़ वह विशाल इ़बादत है जो सब से प्रथम फर्ज़ हुई।  कोई शरीअ़त नमाज़ की फरज़ियत से खाली ना रही।  सम्पूर्ण पौगम्बरों पर और इन के समुदाय पर नमाज़ फर्ज़ रही।  

नमाज़ के समापन व संपादन पर सवाब व पुण्य के गवाही स्थापित हैं और नमाज़ छोड़ने पर अज़ाब की चेतावनी वर्णन है।  इसी कारण से इसलाम-जाति नमाज़ को बहुत अधिक महत्व देते हैं।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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