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f:2200 -  सरकार के रौज़े की ज़ियारत करने की हदीस सहीह व मुसतनद है > Back
Question
सरकार के रौज़े की ज़ियारत करने की हदीस सहीह व मुसतनद है
Answer
इस हदीस शरीफ को कई एक मुहद्दिसीन ने रिवायतकिया, इस के दलील बनाने के योग्य होने से संबंधित मुला अ़ली खारी रहमतुल्लाहि अलैह ने लिखा हैः- भाषांतरः- इस हदीस पाक को इ़माम दारखतनी तथा अन्य मुहद्दिसीन ने रिवायत किया तथा इ़मामों व मुहद्दिसीन की एक जमात ने उसे सहीह घोषित किया है। (शरह अल शफा लअ़ला अल खारी, जिल्द 3, पः 511) तथा अ़ल्लामा सिंधी रहमतुल्लाहि अलैह ने इस सिलसिले में विस्तार वर्णन की हैः- भाषांतरः- हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम कि धन्य ज़ियारत श्रेष्ठतर पालन तथा अल्लाह तआ़ला से नज़दीकी का विशा साधन है। इस की दलील सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का यह धन्य आदेश हैः जिस ने मेरे (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) पावन रौज़े की ज़ियारत की इस के लिए मेरी शफाअ़त अनिवार्य हो चुकी है। इ़माम दारखतनी तथा अन्य मुहद्दिसीन ने इसे रिवायत किया तथा मुहद्दिस अबदुल हक़ ने इसे सहीह घोषित किया। तथा यह हदीस पाक भी दलील है, सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः जो मेरी (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) ज़ियारत के लिए इस प्रकार आए के स्वंय मेरी ज़ियारत के इस का कोई तथा उद्देश्य ना हो तो क़यामत के दिन इस की शफाअ़त मेरी ज़िम्मे करम पर है। इस की रिवायत मुहद्दिसीन की एक जमात ने की है, इन में मुहद्दिस अबु अ़ली बिन सकन हैं जिन्हों ने अपनी पुस्तक “सुनन सिहाह” में इस हदीस को सहीह घोषित दिया, यह दोनों लोग फन हदीस में इ़मामत का दर्जा रखते हैं जिन्हों ने इन रिवायतों को सहीह कहा है तथा इन का कहना इस व्यक्ति के कहने से उच्च व श्रेष्ठतर है जिस ने इस में निश्चित किया। (हाशिय अल सनदी अ़ला सुनन इ़ब्न माजह, हदीस संख्याः 3103) अ़ल्लामा शहाब उद्दीन खफाजी ने नसीम उर रियाज़ शरह शफा में इस की अधिक विस्तार वर्णन की हैः- भाषांतरः- इस हदीस पाक को इ़माम इ़ब्न खुज़ैमा, इ़माम बज़्ज़ार, इ़माम तबरानी, अ़ल्लामा ज़हबी ने रिवायत किया तथा अ़ल्लामा ज़हबी ने उसे हसन घोषित दिया, इस रिवायत की गई सनदें तथा मान्य हैं जो इस रिवायत की प्रशंसा कर रही है। इस हदीस पाक के रावियों पर निश्चित स्वीकार करने के अयोग्य है जैसा के इ़माम सबकी ने विस्तार के साथ वर्णन कर दिया है। (नसीब उर रियाज़ फी शरह शिफा अल खाज़ी अयाज़, जिल्द 3, पः 511) इस रिवायत को व्याख्या करने के बाद शारह बुखारी इ़माम खुसतुलानी रहमतुल्लाहि अलैह ने फरमायाः भाषांतरः- इस रिवायत को इ़माम अबदुल हक़ ने अपनी पुस्तक “अहकाम व सता” तथा “अहकाम सुग़रा” में वर्णन किया तथा इस की सनद पर कुछ कलाम (कथन) ना किया, तथा इन दोनों पुस्तकों में इन का सनद पर कलाम ना करना इस हदीस शरीफ के सहीह होने की दलील है। (अल मवाहिब लदुनिया, जिल्द 12, पः 179) उपर्युक्त तफसील से यह बात स्पष्ट होती है के इस रिवायत को कुछ मुहद्दिसीन ने सनद हसन से तथा एक जमात ने सहीह सनद से वर्णन किया है। {और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है, मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}

 

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