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f:2198 -  “पावन रौज़ा” मदीने में होने की हिकमत क्या है? > Back
Question
“पावन रौज़ा” मदीने में होने की हिकमत क्या है?
Answer
मक्के में सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का धन्य जन्म हुआ। आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) ने अल्लाह के आदेश से प्रवासन किया तथा मदीने मुनव्वरह तशरीफ लाय। बैतुल्लाह शरीफ भी मक्के में है। हज्ज के सारे मनासिक मक्के, अ़रफात व मुज़दलिफा में संपादन किए जाते हैं। अल्लाह यदि चाहता तो सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का रोज़ा भी मक्के में होता, किन्तु ऐसा ना हुआ बल्कि आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) का पावन रौज़ा मदीने में रखा ताकि आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) के दरबार की उपस्थिति हज्ज की तुफैल ना बन जाए बल्कि आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) के उच्च दरबार में उपस्थिति के लिए स्थायी रूप से यात्रा की जाए। जैसा के हज़रत ख्वाजा बन्दा नवाज़ रहमतुल्लाहि अलैह फरमाते हैः “यह अल्लाह की मरज़ी थी के रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का पावन रौज़ा धन्य मक्के में ना हो, ताकि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की ज़ियारत हज्ज के लिए नाहो जाए, हज्ज कअ़बा के बाद अलग से विशेष उद्देश्य से, मदीने का किया जाए, इ़माम शाफअ़ के कथन के अनुसार तो मक्के के प्रकार मदीना भी हरम है परन्तु आदर व सम्मान के अनिवार्य होने के बारे में तो सब ही अनुकूल व ऐक्य हैं”। (जवामअ़ अल कलम, पः 361) {और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है, मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}

 

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