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f:2197 -  सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के पावन दरबार में सलाम पेश करने के शिष्टाचार > Back
Question
सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के पावन दरबार में सलाम पेश करने के शिष्टाचार क्या हैं?
Answer
मनुष्य जितनी बडी व्यक्तित्व के पास जाने का उद्देश्य करता है इतना ही अधिक प्रबंध व व्यवस्था करता है। संार में हमें बहुत से उदाहरण मिलते हैं। दरबार रिसालत सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम वह उच्च दरबार है जहाँ फरिश्ते बाअदब व सभ्याचार से उपस्थित होते हैं, बड़े बड़े ऑलिया व माननय हस्तियां, सर नीचे, निगाहें नीचे, शरीर से कांपचे अतः अदब के पैकर बन कर उपस्थित होते। अर्थात पावन रौज़े के ज़ियारत करने वालों को शिष्ठाचार का लिहाज रखना चाहिए। इस सिलसिले में इ़माम खुसतुलानी रहमतुल्लाहि अलैह ने मवाहिब लदुनिय में लिखा हैः- भाषांतरः- ज़ियारत करने वालों के लिए यह सर्वश्रेष्ट है के वह मवाजह शरीफ से चार गज़ की दूरी पर ठहरें, अदब के पैकर हो कर विनम्रता व लाचारी को अपने ऊपर अनिवार्य कर लें, उच्च दरबार में अपनी निगाह को नीची किए हुए इस प्रकार उपस्थित हो जैसे आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) ज़ाहिरी हयात में आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) के रूबरू उपस्थित हुआ करते। तथा इस बात का लिहाज रखें के आप अपने दरबार में इस के उपस्थित होने को जानते हैं एवं इस के सलाम को सुनते हैं जैसा के आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) अपनी ज़ाहिरी धन्य जीवन में सुना करते थे। क्यों के समुदाय का मुशाहिदा (दृष्टि) फरमाने के लिए और इन के हालात, उद्देश्य, नीयतें तथा दिली कैफियात को जानने के लिए आप के धन्य जीवन तथा पावन देहान्त में कोई अंतर नहीं। एवं यह सारी चीज़ें आप पर बिल्कुल गुणकारी हैं जिस में किसी प्रकार की पोशीदगी नहीं। (अल मवाहिब लदुनिय मअ़ शरह अज़ ज़ुरखानी, जिल्द 12, पः 195) {और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है, मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}

 

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