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f:2196 -  सलाम पेश करते समय किस ओर रुख करें ? > Back
Question
सलाम पेश करते समय किस ओर रुख करें ?
Answer
पावन रौज़े कि ज़ियारत करने वाले इस विश्वास के साथ पूज्य दरबार में उपस्थित हों के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम जीवित हैं। सलातु सलाम को बिना किसी निर्मय के सुनते हैं एवं उत्तर भी प्रदान करते हैं। सुनन इ़ब्न माजह में हदीस पाक है, सरकार दो आ़लम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः- भाषांतरः- निस्संदेह अल्लाह ने धरती पर हराम कर दिया के वह पैगम्बरों के शरीरों को खाएं, अल्लाह तआ़ला के नबी जीवित हैं, रिस्ख पाते हैं। (सुनन इ़ब्न माजह, हदीस संख्याः 1706) दरबार नबवी के शिष्ठाचार व सभ्याचार के सिलसिले में मुहद्दिसीन व फिक़्ह लोगों ने वर्णन किया है के जब सलाम पेश करने के लिए उपस्थित हों तो इस प्रकार सम्मानपूर्वक व आदरपूर्वक ठहरें के चहरा मवाजह शरीफ की ओर हो एवं पीठ क़िबले की ओर हों। इ़माम मालिक रहमतुल्लाहि अलैह ने खलीफे अबु जअ़फर मनसूर को यही फरमाया था के जब धन्य दरबार में उपस्थित हों तो सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की ओर ही रुक़ कर के प्रार्थना व दुआ़ करें। सुबूलुल हुदा वर्रिशाद में रिवायत हैः- भाषांतरः- और जब बनी अब्बास के दूसरे खलीफा अबु जअ़फर मनलूप अबदुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अब्बास ने इ़माम मालिक रहमतुल्लाहि अलैह से मसजिद नबवी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम में मुनाज़िरा किया तो इ़माम मालिक रहमतुल्लाहि अलैह ने इन से फरमायाः ऐ अमीरुल मोमिनीन अपनी आवाज को इस मसजिद में बुलंद ना करो! क्यों के अल्लाह तआ़ला ने एक श्रेष्ठतर क़ौम को शिष्ठाचार व सभ्याचार सिखाते हुए (क़ुरान पाक में) फरमाया “अपनी आवाज़ों को नबी करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की आवाज पर बलुंद ना करो!” निस्संदेह आप की ज़ाहिरी हयात में जिस प्रकार आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) का आदर व सम्मान अनिवार्य था आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) के पावन देहान्त के बाद भी इसी प्रकार आदर व सम्मान के लिहाज रखा जाए। तो खलीफा अबु जअ़फर अदब व सम्मान से हो गए तथा इ़माम मालिक से पूछने लगे केः ऐ अबु उ़बैदुल्लाह उपस्थिति के समय, मैं क़िबले की ओर रुक़ करुं तथा दुआ़ करुं या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की ओर रुक़ करुँ? तो आप ने फरमायाः आप अपने चहरे को सरकार के दरबार से कैसे फेर सकते हो? जबके आप की धन्य जात ही क़यामत के दिन अल्लाह तआ़ला के दरबार में आप के लिए और आप के पिता आदम अलैहिस सलाम के लिए वसीला है। हर वर्ष मैं आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) की ओर रुक़ करें और आप से शफाअ़त की इच्छा करुँ। अल्लाह तआ़ला तुम्हारे लिए मैं सिफारिश स्वीकार करेगा। क्यों के यही वह जात बरकत वाले हैं जिस के वास्ते तुम्हारे अधिकार में तुम्हारी विनती स्वीकार किया जाएगा। अल्लाह तआ़ला का आदेश भी इस पर है। (सुबूलुल हुदा वर्रिशाद, जिल्द 11, पः 423) {और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है, मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}

 

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