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f:2194 -  ज़ियारत करने वालों से सलाम पेश करने कि विनती करना > Back
Question
ज़ियारत करने वालों से सलाम पेश करने कि विनती करना
Answer
हर मोमिन बन्दा की इच्छा यह होती है के वह अपने नबी करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के उच्च दरबार में अदब व सम्मान से उपस्थित हो कर सलातु सलाम का नज़राना पेश करें। पावन रौज़े की ज़ियारत करने वाले तो अनन्य रूप से सलातु सलाम पेश करते हैं किन्तु जो लोग वहाँ जा नहीं सके वह हाजी लोग से निवेदन करते हैं के वह इन की ओर से पावन दरबार में सलाम पेश करें। हज़रत अ़म्र बिन अबदुल अज़ीज़ रहमतुल्लाहि अलैह प्रबंध के साथ सीरिया देश से एक व्यक्ति को रवाना करते के वह आप की ओर से धन्य दरबार में सलाम पेश करें, जैसा के इ़माम बैहखी की शुअ़बुल इमान तथा इ़माम खुसतुलानी की मवाहिब लदुनिया में रिवाय हैः- भाषांतरः- यह रिवायत सबूत के पाय को पहुंच चुकी है के हज़रत अ़म्र बिन अबदुल अज़ीज़ रहमतुल्लाहि अलैह सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के दरबार में सलाम पेश करने के लिए (सीरिया देश) से एक संदेशवाहक को रवाना किया करते। (शुअ़बुल इ़मान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 4007,4008 / अल मवाहिब लदुनिया मअ़ शरह ज़ुरखानी, जिल्द 12, पः 184) {और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है, मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}

 

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