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f:2188 -  मसजिद नबवी से निकते समय जूते आदि पटकना > Back
Question
मसजिद नबवी से निकलते समय जूते आदि पटकने वालों के लिए का निर्देश है?
Answer
किसी भी काम को सहजता व विश्राम व सुगमता व शान्ति के साथ करना चाहिए। व्यग्रता व बेचैनी तबियत के लिए प्रिय नहीं। हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम सम्पूर्ण कार्य को विश्राम व सहजता के साथ परिणाम देते। अर्थात सहीह मुसलिम, जिल्द 1, किताबुल जनाइज़, पः 313, हदीस संख्याः 974) में हैः- भाषांतरः- मोमिनों की माँ हज़रत आयशा सिद्दीखा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाती हैं हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने सहजता व सादगी से अपनी चादर मुबारक ली, विश्राम से मुबारक चप्पल पहनी, नीरसता से दरवाज़ा खोल कर बाहर तशरीफ ले गए फिर आहिस्ता से दरवाज़ा बंद किया। (सहीह मुसलिम, जिल्द 1, किताब अल ज़नाईज़, पः 313, हदीस संख्याः 974) किसी भी अवसर पर चप्पल आदि पटकना धरती पर इस प्रकार जोर से रखना के जिस से आवाज आए नापासंदीदा है। तथा मसजिदों से निकलते समय यह कर्म जहाँ तक हो सके नापसंदीदा है। मसजिद में प्रवेश होते समय, निकलते समय तथा मसजिद के भीतर इस के शिष्ठाचार व सभ्याचार का अनुसार रखा जाए। ऐसी कोई आवाज ना की जाए जिस से नमाज़ियों तथा ज़िक्र व तिलावत करने वालों को समस्या हो। अर्थात चप्पल आदि रखते समय आहिस्ता से रखना चाहिए। यह सामान्य मसजिदों के अहकाम हैं तथा विशेष रूप से मसजिद नबवी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम तथा मसिजद हराम शरीफ के शिष्ठाचार व सभ्याचार तो अन्य मसजिदों के तुलना में अधिक है इस लिए हाजी लोग व ज़ियारत करने वालों को चप्पल पहनते तथा रखते समय इन पावन स्थान के आदर व सम्मान का अनुसार करते हुए इस प्रकार की उपेक्षा व असावधानी से सम्पूर्ण रूप से सावधान रहना चाहिए। {और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है, मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}

 

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