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  मसजिदों और मसजिदों में ज़िक्र करने की उत्तमता
   
 

 मसजिदों और मसजिदों में ज़िक्र करने की उत्तमता

 

भाषांतरः हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है उन्हों ने कहा के रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश किया के जब तुम जन्नत के बाग़ों में से गुज़रो तो फल खाओ, निवेदन किया गया के या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जन्नत के बाग़ें क्या है?  नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया के मसजिदें हैं, प्रश्न किया गया के फल खाना क्या है या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम?  नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया के सुब्हानअल्लाह वलहम्दुलिल्लाह वला इलाहा इलल्लाहु वल्लाहु अकबर पढ़ना (यही फल खाना है)। 

 

(इस की रिवायत तिरमिज़ी ने की है)। 

 

इस हदीस में वर्णन है के मसजिद में सुब्हानअल्लाह वलहम्दुलिल्लाह वला इलाहा इलल्लाहु वल्लाहु अकबर पढ़ना चाहिए।  स्पष्ट हो के इन कथन के पढ़ने के जो निर्देश वर्णन है इस से ये उद्देश्य नहीं के केवल इन्हीं कथन व कलिमात का पढ़ना नियुक्त है बल्कि इन कलिमात का ज़िक्र तमसीलन है तथा उद्देश्य ये है के अल्लाह तआला का ज़िक्र किया जाए।  (मिरखात)

 

{उद्धरणः नूरुल मसाबीह, जिल्द 02}

   
 
 
 
 
 
 

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