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  हसनैन करीमैन से मुहब्बत- अल्लाह से मुहब्बत की जमानत
   
 

 हसनैन करीमैन से मुहब्बत- अल्लाह से मुहब्बत की जमानत

 

हज़रत उ़सामा बिन ज़ैद रज़ियल्लाहु तआला अन्हुमा से मरवी हदीस शरीफ में हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने हसनैन करीमैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से संबंधित अनुदेश कियाः

 

भाषांतरः यह दोनों मेरे (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) बेटे हैं तथा मेरी बेटी के बेटे हैं।  ऐ अल्लाह!  तू इन दोनों से मुहब्बत व स्नेह फरमा तथा जो इन से मुहब्बत रखे इसके अपना महबूब व प्रिय बनाले। 

 

(जामे तिर्मिज़ी, हदीस संख्याः 4138) 

 

अल्लाह तआ़ला का प्रिय व महबूब मन्ना इ़माम आ़ली मखाम कि मुहब्बत से भाग्य होती है।  जैसा के हदीस शरीफ में हैः-

 

भाषांतरः अल्लाह तआ़ला इस को अपना प्रिय व महबूब बनाले जिस ने हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मुहब्बत व स्नेह रखी। 

 

(जामे तिर्मिज़ी, जिल्द 2, पः 218, हदीस संख्याः 4144) 

 

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने इ़माम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को अपनी पावन गोद में उठाया तथा आप के लबों को बोसा दे कर दुआ़ फरमाईः-

 

भाषांतरः ई़लाही मैं इन से मुहब्बत रखता हुँ तू भी इन से मुहब्बत रख एवं  जो इन से मुहब्बत रखे इस को अपना महबूब व प्रिय बनाले। 

 

(जामे तिर्मिज़ी, जिल्द 2, पः 218, हदीस संख्याः 4138)

   
 
 
 
 
 
 

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