CI: 169   
टब में खून गिर जाए तो क्या आदेश है?
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  CI: 168   
छाती और पीठ के बाल निकालने का आदेश
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  CI: 167   
हेलो (Hello) के 2 अर्थ और इन का आदेश
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  CI: 166   
सूर्य ग्रहण की नमाज़ का आदेश
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  CI: 165   
क्या महिलाओं का फैशियल कराना जायज़ है?
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  CI: 164   
खादियानी से कुरबानी का गोश्त लेना ?
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  CI: 163   
क़ुरबानी के दिन और समय
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  CI: 162   
कर्जदार के लिए क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 161   
ऑनलाइन क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 160   
अमरीका एवं अन्य देशों में नागरिक सदस्यों की भारत में क़ुरबानी
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  CI: 159   
जानवर के कौनसे अंग व भाग खाना श्रेष्ठ नहीं
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  CI: 158   
जानवर के पैर में घाव आए तो क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 157   
दंतहीन जानवर की क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 156   
धनवान बच्चों पर क़ुरबानी ?
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  CI: 155   
व्यापारिक लोगों पर क़ुरबानी
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  CI: 154   
इंटरनेट पर गपशप (चैटिंग) का इसलामी आदेश
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  CI: 153   
स्त्री व महिला का नौकरी करने का आदेश
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  CI: 152   
चीटियों को मारने का शरई आदेश
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  CI: 151   
कुत्ता पालने का शरई आदेश
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  CI: 150   
महिला का होटल और पार्कों में जाने का आदेश
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CI 164- खादियानी से कुरबानी का गोश्त लेना ?

  खादियानी से कुरबानी का गोश्त लेना ?

 

सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की पावन ज़ात से संबंधित नबूवत के अन्तिमता व नबूवत की मोहर का विश्वास के आप ही अंतिम नबी व पैगम्बर हैं आप के बाद कोई नबी व रसूल (पैगम्बरआने वाला नहीं है।  

ये इसलाम के बुनियादी व आधारिक विश्वास में से है जो क़ुरान मजीद व हदीसों के इबादुतल नस तथा उम्मत के संग्रहित से साबित हैजिस का इन्कार करना या इस में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन व बदलाव करना स्पष्ट कुफ्र है।  

अल्लाह तआला ने अपने पावन कलाम में आदेश कियाः 

भाषांतरः मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तुम्हारे पुरुषों में से किसी के पिता नहीं किन्तु वह अल्लाह तआला के रसूल हैं एवं सब पैगम्बरों के नबूवत के सिलसिले को अंत करने वाले हैं।  

(
सुरह अल अहज़ाबः 33:40)  

सिहा सित्ता (हदीस की पुस्तकोंव सुननमसनदों में इस विषय की माननीय व प्रमाणिय हदीसें उपलब्ध हैं जो उच्च माननीय का स्तर रखती हैं।  

उदाहरण के रूप में सहीह बुखारी तथा जामेअ तिरमिज़ी से रिवायत वर्णन की जाती है,सहीह बुखारी में एक लम्बी हदीस में सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का आदेश हैः- 

भाषांतरः परन्तु ये के मेरे बाद किसी भी प्रकार का कोई नबी नहीं आ सकता।  

(
सहीह बुखारीजिल्द 02, पः 633, हदीस संख्याः 4154)  

जामेअ तिरमिज़ी में हदीस पाक हैः- 

भाषांतरः हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः निश्चय रिसालत व नबूवत वश्य अंत हो चुकी है मेरे (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लमबाद ना कोई नबी हो सकता है एवं ना कोई रसूल।  

(
जामेअ तिरमिज़ीजिल्द 02, पः 53, हदीस संख्याः 2441)  

जैसा के फतावा आलमगिरीजिल्द 02, पः 263 पर उल्लेख हैः- 

भाषांतरः यदि कोई व्यक्ति ये विश्वास ना रखे के हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अंतिम नबी हैं तो वह मुसलमान ही नहीं।  

क़ुरान व हदीस के आधार पर अरब व अजमपूरब व पश्चिमउत्तर व दक्षिण के पूर्ण इसलाम के विद्वानों ने सर्वसम्मति व अनुकूलता मिरज़ा खादियानी एवं इस के पालन करने वालों को इसलाम के सीमा से बाहर एवं काफिर घोषित किया है।  

अर्थात मिरज़ा गुलाम अहमद खादियानी के अनुगामी व अनुयायी जो खादियानी कहलाते हैं वह मुसलमान नहीं जब के ज़िबा के शर्तों में ज़िबा करने वाले का मुसलमान होना बी एक शर्त है।  

यदि ज़िबा करने वाला ग़ैर-मुसलिममुशरिक या मुरतद (स्वधर्म भ्रष्ट व स्वधर्म त्यागीहो तो ज़बीहा हलाल नहीं होता।  उपर्युक्त वर्णन विस्तार के आधार पर खादियानियों का ज़िबा किया हुआ हराम है।  

इन की क़ुर्बानी शरन क़ुर्बानी नहीं एवं ना इन का ज़िबा शरन ज़िबा है इस का गोश्त खाना शरन जाइज़ नहीं।  इसी प्रकार मुसलमानों के लिए जाइज़ नहीं के खादियानियों को क़ुर्बानी का गोश्त दें।  

जैसा के फतावा आलमगिरी, किताब उज़ ज़िबाह में इस का विस्तार उल्लेख है। 



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