CI: 169   
टब में खून गिर जाए तो क्या आदेश है?
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  CI: 168   
छाती और पीठ के बाल निकालने का आदेश
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  CI: 167   
हेलो (Hello) के 2 अर्थ और इन का आदेश
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  CI: 166   
सूर्य ग्रहण की नमाज़ का आदेश
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  CI: 165   
क्या महिलाओं का फैशियल कराना जायज़ है?
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  CI: 164   
खादियानी से कुरबानी का गोश्त लेना ?
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  CI: 163   
क़ुरबानी के दिन और समय
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  CI: 162   
कर्जदार के लिए क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 161   
ऑनलाइन क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 160   
अमरीका एवं अन्य देशों में नागरिक सदस्यों की भारत में क़ुरबानी
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  CI: 159   
जानवर के कौनसे अंग व भाग खाना श्रेष्ठ नहीं
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  CI: 158   
जानवर के पैर में घाव आए तो क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 157   
दंतहीन जानवर की क़ुरबानी का आदेश
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  CI: 156   
धनवान बच्चों पर क़ुरबानी ?
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  CI: 155   
व्यापारिक लोगों पर क़ुरबानी
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  CI: 154   
इंटरनेट पर गपशप (चैटिंग) का इसलामी आदेश
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  CI: 153   
स्त्री व महिला का नौकरी करने का आदेश
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  CI: 152   
चीटियों को मारने का शरई आदेश
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  CI: 151   
कुत्ता पालने का शरई आदेश
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  CI: 150   
महिला का होटल और पार्कों में जाने का आदेश
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CI 154- इंटरनेट पर गपशप (चैटिंग) का इसलामी आदेश

 चैटिंग का अर्थ आपस में बात एवं वार्तालाप करना है जो अवश्यकता की सीमा तक जाइज़ व मुबाह (अनुमत व अनुज्ञेय) है।  व्यर्थ व निर्थक वार्तालाप करना और निष्फल में व्यस्त रहना जिस प्रकार आमने-सामने अप्रसन्न व नापसंदीदा है इसी प्रकार फोन, इंटरनेट आदि पर भी निषिद्ध है।  मोमिन की शान ये है के वह व्यर्थ वार्तालाप करना तो दूर की बात व्यर्थता की ओर ध्यान भी नहीं करता।  अल्लाह तआ़ला ने सफलता पाने वाले मोमिनीन के जो लक्षण वर्णन किए हैं पूर्ण इन के ये हैः- 


भाषांतरः- और ये वह हैं जो हर व्यर्थ बातों से पहलू बचाते हैं।  

(सुरह अल मोमिनून: 23:03)  


समय व फुरसत एक पेश विशाल व भरपूर वरदान है जिस का सम्मान अनिवार्य व अवश्य है।  क़यामत के दिन एक-एक पल का उत्तर देना पडेगा।  सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने फुरसत के समय को ग़नीमत जान्ने का आदेश दिया और इस को सुधारता व भले, हिदायत के कामों में खर्च करने की शिक्षा दी है।  

मुहद्दिस-देक्कन हज़रत सैय्यद अबदुल्लाह शाह नक्षबंदी खादरी रहमतुल्लाहि अलैह ने ज़ुजाजातुल मसाबीह, जिल्द 4, पः 148-149 में जामेअ़ तिरमिज़ी के हवाले से हदीस पाक व्याख्या की हैः- 

भाषांतरः- हज़रत उमर बिन मैमून औदी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु वर्णित करते हैं हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने एक व्यक्ति को उपदेश करते हुए फरमायाः तुम 5 चीज़ों को 5 चीज़ों से पूर्व ग़नीमत जानो।  अपनी युवावस्था को बुढ़ापे से पहले ग़नीमत जानो, अपनी स्वस्थ को बीमारी से पहले और मालदारी को दरिद्रता से पहले और फुरसत को व्यस्त व उदयोग से पहले और जीवन को मौत से पहले।  

अधिक ये हदीस मुसनद इमाम अहमद हदीस संख्याः 7957, और इमाम बैहखी की शुअ़बुल इमान में वर्णन है।  हदीस संख्याः 9882  

इस से मालूम होता है के एक समृद्ध व अभिमन्त्रित व धर्मनिष्ट मुसलमान वह है जो अपने प्रफुल्लित समय का सम्मान करे और इस को व्यर्थता कामों में व्यर्थ ना करें, बिना कारण इंटरनेट पर व्यर्थता कामों में अनमोल समय को व्यर्थ करना, अजनबी महिलाओं से वार्तालाप करना नाजाइज़ व निषिद्ध है और क़यामत के दिन इस की पूछ होगी, दुर्दे मुक़तार, जिल्द 5, पः 260 में है।  

पुरुष के लिए जाइज़ नहीं के वह अजनबी महिला व स्त्री से वार्तालाप करें किन्तु व्यापार व कारोबार से संबंधित या शरई़ मसाइ़ल में निर्देशन की अवश्यकता आई हो तो अवश्यकता के रूप के अनुसार चैटिंग करने में कोई समस्या नहीं।  अतः इस कर्म का अनुसार रहे के समय व्यर्थ ना होने पाय।  



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