BT: 170   
हज़रत ग़ौसे पाक की विलायत
...............................................
  BT: 168   
पवित्र शरीर की विशेषक विशालता
...............................................
  BT: 167   
सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का परमपावन जन्म - विशिष्टता व प्रमुखता
...............................................
  BT: 166   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक
...............................................
  BT: 165   
मसजिद की उत्तमता
...............................................
  BT: 164   
अल्लाह तआला ही इबादत के योग्य - शिर्क क्षमा के योग्य नहीं
...............................................
  BT: 163   
दोज़ख़ का हाल
...............................................
  BT: 162   
दुरूद शरीफ - उत्तमता व प्रतिष्ठा
...............................................
  BT: 161   
तौहीद व रिसालत का अखीदा - ईमान की बुनियाद
...............................................
  BT: 160   
जन्नत के हालात
...............................................
  BT: 159   
यज़ीद की करतूतें
...............................................
  BT: 158   
इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का जीवन क़ुरानी आयतों की अमली तफसीर
...............................................
  BT: 157   
यज़ीद का सत्य चेहरा - हदीस व इतिहास के आईने में
...............................................
  BT: 156   
हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की सत्यता और क़ुस्तुनतुनिया की हदीस कि सच्चाई
...............................................
  BT: 155   
इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु का उच्च स्थान
...............................................
  BT: 154   
इ़माम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु - सत्यता के आदर्श
...............................................
  BT: 153   
औरत को जन्नत में प्रवेश करने वाले कर्म
...............................................
  BT: 152   
हज़रत फारूक़ आज़म सत्य व असत्य के बीच अंतर का कारण
...............................................
  BT: 151   
क़ुरान करीम – शिक्षा व मार्गदर्शन की ग्रन्ध
...............................................
  BT: 150   
हज़रत इसमाईल अलैहिस सलाम की क़ुरबानी – संतुष्टि का महान उदाहरण
...............................................
 

 
औरत को जन्नत में प्रवेश करने वाले कर्म
 

 औरत को जन्नत में प्रवेश करने वाले कर्म

 

भाषांतरः हज़रत अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है वह फरमाती हैं के रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश किया है के जो महिला पाँचो समय की नमाज़ पढ़ती रहती हो और रमज़ान के रोज़े रखती हो और अपनी शर्मगाह (गुप्तांग) की सुरक्षा करती रही हो एवं अपने पति की आज्ञापालन करती रहे तो वह जन्नत के जिस दरवाज़े से चाहे प्रवेश हो जाए। 

 

(इस की रिवायत अबु नुअम ने हिलये में की है)

 

पति की संतुष्टि पत्नी के जन्नत में दाखिल होने का कारण

 

भाषांतरः हज़रत उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा से वर्णित है वह फरमाती हैं के रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश किया है के जो कोई महिला इस स्थिति में देहान्त करे के उस का पति उस से सन्तुष्ट था तो वह जन्नत में दाखिल होगी। 

 

(इस की रिवायत तिरमिज़ी ने की है) 

 

सर्वश्रेष्ठ महिला के गुण

 

भाषांतरः हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है वे फरमाती हैं के रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से पूछा गया के महिलाओं में कौनसी महिला श्रेष्ठतर है?  आप (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) ने आदेश किया के वह महिला व स्त्री (श्रेष्ठतर है) के पति उस को देखे तो वह उस को खुश व प्रसन्न कर दे और पति उस को किसी काम का आदेश दे तो वह उस को संपादन करे तथा अपनी जान में और उस के धन में पति की नाराज़गी का कारण हो विरुद्ध ना करे। 

 

(इस की रिवायत नसाई ने बैहखी ने शुअबुल ईमान में की है)

 

बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है

 

भाषांतरः हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है वह फरमाते हैं के रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश किया है के यदि मैं किसी को (अल्लाह तआला के सिवा) किसी और के आगे सजदा करने का आदेश देता तो मैं औरत को आदेश देता के वह अपने पति को सजदा करे। 

 

(इस की रिवायत तिरमिज़ी ने की है) 

 

बीवी अपने पति को और एक मनुष्य दुसरे मनुष्य को जीवन में और ना मरने के बाद क़ब्र को सजदा करे

 

भाषांतरः हज़रत ख़ैस बिन सअद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है वे फरमाते हैं के मैं (जब) हैरह (जो कूफा के खरीब एक प्राचीन नगर था) आया तो वहाँ के लोगों को देखा के अपने सरदार को सजदा कर रहे हैं।  (ये देख कर अपने दिल में) मैं ने कहा के निश्चय रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इस बात के अधिक योग्य हैं के आप को सजदा किया जाए।  फिर मैं (जब मदीने पाक वापस हुआ तो) रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की सेवा में उपस्थित हो कर निवेदन किया के मैं शहर हैरह गया था तो वहाँ के लोगों को देखा के वे अपने सरदार को सजदा करते हैं हालाँकि आप (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) ज्यादा अधिकारी हैं के आप को सजदा किया जाए (इस लिए के आप (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) निर्माण में सब से अधिक बुज़ुर्ग और मौजुदात में सब से अधिक माननीय हैं ये सुन कर) आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया बताओ के (मेरे देहान्त के बाद) यदि तुम मेरी क़ब्र से गुज़रो तो क्या मेरी क़ब्र को (या क़ब्र वाले को) सजदा करोगे तो मैं ने निवेदन किया के नहीं (मैं सजदा नहीं करुँगा) आप ने फरमाया के तुम (मेरे जीवन में और मेरे बाद मेरी क़ब्र को) सजदा ना करो (फिर आप ने फरमाया) के यदि किसी को सजदा करने का आदेश देता तो महिलाओं को आदेश देता के वह अपने पतियों को सजदा करें क्यों के अल्लाह तआला ने पुरुषों का अधिकार महिलाओं पर अधिक रखा है। 

 

(इस की रिवायत अबु दाउद ने की है और इमाम अहमद ने इस की रिवायत मआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से की है)

 

पति यदि बीवी को अति कठिन काम का भी आदेश दे तो वह इस को संपादन करे

 

भाषांतरः हज़रत आयशा सिद्दीखा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा से वर्णित है के रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मुहाजिरीन और अनसार की एक जमात में तशरीफ फरमा थे एक ऊँट आया और आप को सजदा किया आप के सहाबा ने विनती की या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम आप को चौपाय और पेड़ सजदा करते हैं तो हम अधिक अधिकारी हैं के आप को सजदा करें।  (ये सुन कर) आप ने फरमाया के (सजदा इबदत है) तो तुम अपने रब (ही) की इबादत करो और अपने (मुसलमान) भाई का सम्मान करो तथा यदि मैं किसी को किसी के आगे सजदा करने का आदेश देता तो औरत को आदेश देता के वह अपने पति को सजदा किया करे (और पति का इतना बड़ा दर्जा है के) यदि वह पत्नी को आदेश दे के वह ज़र्द पहाड़ से पत्थर सियाह पहाड़ पर ले जाए और (फिर सियाह पहाड़ से सफेद पहाड़ की ओर (ले जाए) तो उस को चाहिए के इस का आदेश संपादन करे। 

 

(इस की रिवायत इमाम अहमद ने की)। 

 

पत्नी यदि अपने पति को सताए तो जन्नत में हूर उस को बददुआ देती है

 

भाषांतरः हज़रत मआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है वह हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से वर्णित करते हैं के आप ने आदेश किया के जब कोई महिला (औरत) अपने पति को दुनिया में तकलीफ देती है तो (जन्नत की) बड़ी आँखों वाली हूरों में से वह हूर जो उस की पत्नी बनेगी कहती है अल्लाह तआला तुझ को हलाक व नाश करे (तू उसे मत सता) वह तो तेरे पास (कुछ दिन के लिए) मेहमान व अतिथि है और वह बहुत शीघ्र व जल्द तुझे छोड़ कर (जन्नत में) हमारे पास आने वाला है।  (इस से मालूम हआ के दुनिया वालों के कर्म व कृत्यु से उच्च स्थान (मलाऐ-आला) जानकारी व अनुभव रहते हैं। 

 

(इस हदीस की रिवायत तिरमिज़ी और इब्न माजह ने की है)

 

{उद्धरणः नूरुल मसाबीह, जिल्द 08}

 
     
   
     
 
 
   
Copyright 2008 - Ziaislamic.com All Rights Reserved