AR: 349   
ग़ौसे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की आदरणीय फूफी
..........................................
  AR: 348   
मसजिदों और मसजिदों में ज़िक्र करने की उत्तमता
..........................................
  AR: 347   
मसजिद की प्रतिष्ठा और बाज़ार की मज़म्मत
..........................................
  AR: 346   
छाती और पीठ के बाल निकालने का आदेश
..........................................
  AR: 345   
हज़रत अबदुल करीम रहमतुल्लाहि अलैह खौफ का महत्वपूर्ण बतलाते हुए केहते है
..........................................
  AR: 344   
ख़ौफ व भय - अल्लाह से नज़दीकी का माध्यम
..........................................
  AR: 343   
सरकार पाक ने हसनैन करीमैन कि लिए खुत्बा रोक दिया
..........................................
  AR: 342   
धर्म का इतना ज्ञान प्राप्त करना जिस से धर्म श्रेष्ठ हो - प्रत्येक मुसलमान पर फर्ज़ है
..........................................
  AR: 341   
इ़माम हुसैन के लिए सरकार पाक ने सजदा लम्बा कर दिया
..........................................
  AR: 340   
हसनैन करीमैन से मुहब्बत- अल्लाह से मुहब्बत की जमानत
..........................................
  AR: 339   
टोपी पहन्ने का सबूत
..........................................
  AR: 338   
करामत का सबूत - क़ुरान करीम से
..........................................
  AR: 337   
क़ुस्तुनतुनिया की हदीस पर एक संदेह और उसका उत्तर
..........................................
  AR: 336   
क़ुस्तनतुनिया के हदीस पर उपसंहार व निष्कर्ष
..........................................
  AR: 335   
मदीने वालों पर अत्याचार की हद पार करदी
..........................................
  AR: 334   
यज़ीद ने इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के धन्य दाँतों को कचोके दिए
..........................................
  AR: 333   
हमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की हत्या का यज़ीद ने आदेश दिया! इब्न ज़ियाद का स्वीकृति वर्णन
..........................................
  AR: 332   
लड़कों के शासन से अल्लाह की सुरक्षा माँगों
..........................................
  AR: 331   
मेरी उम्मत का विनाश खुरैश के कुछ लड़कों के हाथों से होगी
..........................................
  AR: 330   
हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की सत्यता व सच्चाई
..........................................
  AR 332 : लड़कों के शासन से अल्लाह की सुरक्षा माँगों

 लड़कों के शासन से अल्लाह की सुरक्षा माँगों

 

मुसनद इमाम अहमद में हदीस पाक है (हदीस संख्याः 3800)-

 

भाषांतरः हज़रत सैयदना अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है हज़रत रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः सत्तर की दिहाई के आरम्भ से और लड़कों के राज्य व शासन से अल्लाह तआला की पनाह व सुरक्षा माँगों। 

 

(मुसनद अहमद, हदीस संख्याः 3800) 

 

सहीह बुखारी के अनुवादक फत्हुल बारी हाफिज़ अहमद बिन हजर असखलानी रहमतुल्लाहि अलैह (जन्मः 773 हिज्री, देहान्तः 852 हिज्री) मुसन्नफ इब्न अबी शैबा के हवाले से हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की ही एक और रिवायत व्याख्या करते हुए लिखते हैः

 

भाषांतरः मुसन्नफ इब्न अबी शैबा की रिवायत (हदीस) में है के हज़रत सैयदना अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु बाज़ार में चलते हुए भी ये दुआ करते अए अल्लाह!  सन 60 हिज्री और लड़कों का राज्य व शासन मुझ तक ना पहुँचे। 

 

हाफिज़ इब्न हजर असखलानी रहमतुल्लाहि अलैह रिवायत व्याख्या करने के बाद फरमाते हैः- इस रिवायत में इस बात की ओर इशारा है के प्रथम लड़का जो राज्य व शासन बनेगा वह 60 हिज्री में होगा।  अर्थात ऐसा ही हुआ के यज़ीद बिन मुअवियह इसी वर्ष राज्य के आसन पर बैठ और 64 हिज्री तक रह कर हलाक हो गया। 

 

सहीह बुखारी के अनुवादक अल्लामा बदरउद्दीन ऐनी हनफी रहमतुल्लाहि अलैह उमदतुल खारी किताबुल फुतून, जिल्द 16, पः 333 में हुकूमत करने वाले प्रथम लड़के का मसदाख़ नियुक्त करते हुए फरमाते हैः-

 

भाषांतरः हुकूमत करने वाला पेहला लड़का यज़ीद, उस का वह योग्य है। 

 

क़ियामत के खरीब उठने वाले फितनों से संबंधित जो हदीस पाक में वर्णन हैः-

 

भाषांतरः फिर गुमराही की ओर बुलाने वाले आएँगें। 

 

इस हदीस पाक की शरह में हज़रत शाह वली उल्लाह मुहद्दिस दहेलवी रहमतुल्लाहि अलैह हुज्जतुल्लाहिल बलिग़ा, जिल्द 02, पः 213 में लिखते हैः-

 

भाषांतरः और गुमराही की ओर बुलाने वाले सीरिया में यज़ीद और इराक़ में मुक़तार हैं। 

 

फक़्रुल मुहद्दिसीन अबुल हसनात हज़रत सैय्यद अब्दुल्लाह शाह नक्षबंदी मुजद्दिदी खादरी मुहद्दिसे-देक्कन रहमतुल्लाहि अलैह ने मिरखात के हवाले से हज़रत मज़हर रहमतुल्लाहि अलैह का कथन व्याख्या किया हैः-

 

भाषांतरः उन लड़कों से तात्पर्य वह हैं जो खुलेफा-राशिदीन के बाद थे जैसे यज़ीद और अब्दुल मलिक बिन मरवान आदि। 

 

(व्याख्यात्मक ज़ुजाजातुल मसाबीह, जिल्द 04, किताबुल फुतून, पः 228 / मिरखातुल मफातीह, जिल्द 05, किताबुल फुतून, पः 140) 

 

इस सीमित समय में उस ने उम्मत में असाधारण फसाद फैलाया के मदीने पाक में (जहाँ से दुनिया को अमन व सलामती प्राप्त हुई) विनाशक मचाया, पावन मक्का जिस को अल्लाह तआञला ने अमन वाला शहर घोषित किया गोला-तोप का प्रबन्ध कर के कअबा शरीफ पर पत्थर बरसाए। 

 

करबला के मैदान में अहले-बैत किराम पर 3 दिन तक पानी बंद करवा दिया।  इन उच्च ज़ात का निरादर व असम्मान करवाया, नबूवत के परिवार पर अत्याचार का पहाड़ ढ़ाये।  अहले-बैत किराम तथा इन के जान-निसारों को यहाँ तक के शहीदों के सरदार हज़रत सैयदना इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को शहीद करवाया।


submit
Copyright 2008 - Ziaislamic.com All Rights reserved