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पति यदि बीवी को अति कठिन काम का भी आदेश दे तो वह इस को संपादन करे

  WS: 93   
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सर्वश्रेष्ठ महिला के गुण व लक्षण

  WS: 90   
पति की संतुष्टि पत्नी के जन्नत में दाखिल होने का कारण

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किसी की ओर झूठ बाँधने की मज़म्मत

  WS: 87   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

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WS: 87 - हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में

अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

 

भाषांतरः हज़रत अबु सईद खुदरी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है वह फरमाते हैं के एक महिला रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की धन्य सेवा में (अपने पति की शिकायत के लिए) उपस्थित हुईं एवं हम उस समय आप (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) की सेवा में उपस्थित थे उस महिला ने निवेदन किया के मेरे पति सफवान इब्न मुअतल मैं जब नमाज़ पढ़ती हुँ तो मुझे मारते हैं एवं मैं जब (नफ्ल) रोज़े रखती हुँ तो इफ्तार करवा देते हैं।  और (खुद) सूर्य निकलने के बाद फज्र की नमाज़ पढ़ते हैं।  रावी का वर्णन है के (उस समय संयोग से) सफवान भी उपस्थित थे।  रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उन से यानी सफवान से उन (की पत्नी की शिकायतों) के बारे में पूछा।  तो सफवान ने उत्तर दिया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इस का ये कहना के जब मैं नमाज़ पढ़ती हुँ तो वह मुझे मारते हैं (इस कारम ये है के) वह (नफ्ल नमाज़ में) 2 (लम्बी) सूरतें पढ़ती हैं और मैं ने उस को इस से मना किया है रावी कहते हैं के (ये सुन कर) रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया के (सुरह फातिहा के बाद) एक ही सूरत पढ़ी जाए तो (तन्हा व्यक्ति हो या जमात से) सब के लिए काफी हो जाएगी।  (इन के पति सफवान के) कहा के इसका ये कहना के जब मैं (नफ्ल) रोज़ा रखती हुँ तो वह इफ्तार करवा देते हैं इस का कारण ये है के वह लगातार (नफ्ल) रोज़े रखा करती है तथा मैं जवान पुरुष हुँ (क्यों के रात में खेती-बाड़ी के कामों में व्यस्त रेहता हुँ इस लिए दिन में पत्नी से सोहबत करने पर) धीरज व सहन नहीं कर सकता (ये सुन कर) रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया के कोई स्त्री (अपने पति की उपस्थिति में) उस की आज्ञा के बिना (नफ्ल) रोज़ा ना रखा करे अब रहा इस का ये कहना के सूर्य निकलने के बाद (फज्र की) नमाज़ पढ़ता हुँ इस का कारण ये है के हम (खेती-बाड़ी के) लोग हैं तथा ये चीज़ नामवर है (के हम रात भर पानी सीँचते हैं) जिस के कारण से सूर्य निकलने तक उठ नहीं सकते, ये सुन कर रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया सफवान जब तुम नीन्द से उठो तो नमाज़ पढ़ लिया करो (अदा हो या खज़ा)। 

 

(इस की रिवायत अबु दाउद और इब्न माजह ने की है)।

 

{उद्धरणः नूरुल मसाबीहजिल्द 08}

 


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